कन्नौज। जिले की तिर्वा तहसील क्षेत्र के मौजा खैरनगर के मजरा अड्डापुरवा में कृषि भूमि के पट्टे को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। करीब 11 वर्ष पुराने कृषि भूमि आवंटन को लेकर अब दो पक्ष आमने-सामने हैं। एक तरफ कमल पुत्र छुन्नू का कहना है कि वर्ष 2016 में उन्हें आवंटित जमीन पर वह लगातार खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं, लेकिन अब तक भूमिधर अधिकार को लेकर उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ गांव के श्यामसुंदर पुत्र जागेश्वर प्रसाद ने कमल के नाम हुए आवंटन की वैधता पर सवाल उठाते हुए जिलाधिकारी न्यायालय में उसे चुनौती दी है। इस मामले में जिलाधिकारी न्यायालय की ओर से तहसीलदार तिर्वा से विस्तृत बिंदुवार जांच आख्या मांगे जाने का उल्लेख भी सामने आया है।
मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि कमल की पत्नी का निधन हो चुका है और उनके पांच छोटे बच्चों की जिम्मेदारी उन्हीं पर है। कमल खुद भी गंभीर बीमारी से जूझने का दावा कर रहे हैं। उनका कहना है कि कृषि भूमि ही उनके परिवार की आजीविका का मुख्य सहारा है। ऐसे में जमीन के अधिकार को लेकर चल रहा विवाद उनके परिवार के भविष्य पर भी असर डाल सकता है।
दो गाटा संख्याओं में हुआ था कृषि भूमि का आवंटन उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के अनुसार, 8 अगस्त 2016 को कृषि आवंटन पत्रावली स्वीकृत किए जाने का उल्लेख है। इसके तहत कमल पुत्र छुन्नू के नाम गाटा संख्या 1578 मि० में 0.0810 हेक्टेयर और गाटा संख्या 1602 मि० में 0.1620 हेक्टेयर कृषि भूमि आवंटित किए जाने की जानकारी सामने आई है। कमल का कहना है कि तत्कालीन लेखपाल ने उन्हें जमीन पर कब्जा भी दिलाया था। इसके बाद से वह लगातार खेती करते आ रहे हैं।
कमल के मुताबिक, वर्षों तक खेती करने के बाद अब जब उन्होंने संक्रमणीय भूमिधरी अधिकार दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कराई तो उन्हें राजस्व विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उपलब्ध खतौनी के उद्धरण में खाता संख्या 01939 के अंतर्गत गाटा संख्या 1578 मि० पर कमल पुत्र छुन्नू का नाम खातेदार के रूप में दर्ज दिखाई देता है। हालांकि, दोनों गाटा संख्याओं के संबंध में वर्तमान राजस्व स्थिति और अधिकारों की पुष्टि संबंधित अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
श्यामसुंदर ने जिलाधिकारी न्यायालय में उठाए आवंटन की पात्रता पर सवाल दूसरी तरफ गांव निवासी श्यामसुंदर पुत्र जागेश्वर प्रसाद ने जिलाधिकारी कन्नौज के न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर कमल के नाम हुए कृषि भूमि आवंटन को अवैध और नियम विरुद्ध बताया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 128 के तहत कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता श्यामसुंदर का आरोप है कि तत्कालीन भूमि प्रबंधक समिति के अध्यक्ष और सचिव की ओर से कमल के पक्ष में आवंटन की पत्रावली तैयार की गई थी, लेकिन आवंटन के दौरान पात्रता संबंधी नियमों का सही ढंग से पालन नहीं किया गया। उन्होंने खुद को ग्रामसभा की अनुसूचित जाति श्रेणी का पात्र व्यक्ति बताते हुए सवाल उठाया है कि यदि वह आवंटन के लिए पात्र थे तो संबंधित कृषि भूमि किसी दूसरे व्यक्ति के नाम किस आधार पर आवंटित की गई।
श्यामसुंदर ने न्यायालय से आवंटन की प्रक्रिया, पात्रता और संबंधित राजस्व अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है। उनके प्रार्थना पत्र के बाद अब इस मामले में वर्ष 2016 की आवंटन पत्रावली और तत्कालीन भूमि प्रबंधक समिति के प्रस्ताव की पड़ताल महत्वपूर्ण हो गई है।
डीएम न्यायालय ने तहसीलदार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट मामले में जिलाधिकारी कन्नौज के न्यायालय से तहसीलदार तिर्वा को जांच कर स्पष्ट और विस्तृत बिंदुवार आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाने का उल्लेख दस्तावेजों में है। इससे अब राजस्व विभाग की जांच पर दोनों पक्षों की निगाहें टिकी हुई हैं।
जांच में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वर्ष 2016 में आवंटन के समय संबंधित व्यक्ति की पात्रता क्या थी, भूमि प्रबंधक समिति की ओर से कौन सा प्रस्ताव पारित किया गया था और आवंटन की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार संपन्न हुई थी या नहीं। साथ ही वर्तमान खतौनी, कब्जे और भूमिधरी अधिकार से जुड़े अभिलेखों का भी मिलान करना होगा।
लेखपाल पर 50 हजार रुपये मांगने का आरोप इस विवाद के बीच कमल ने हल्का लेखपाल पर काम कराने के बदले कथित तौर पर 50 हजार रुपये मांगने का आरोप भी लगाया है। कमल के अनुसार, उन्होंने 5 सितंबर 2026 को तहसील दिवस में भूमिधर अधिकार दिलाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। उनका कहना है कि उस समय लेखपाल ने उन्हें आश्वासन दिया था कि भूमिधरी दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है।
कमल का आरोप है कि बाद में जानकारी करने पर उन्हें बताया गया कि संबंधित जमीन के पट्टे के लिए किसी अन्य व्यक्ति का आवेदन लंबित है, इसलिए उनका भूमिधर अधिकार दर्ज नहीं हो सकता। इसके बाद उन्होंने लेखपाल पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए अधिकारियों से शिकायत की। हालांकि, रिश्वत मांगने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में संबंधित लेखपाल का पक्ष सामने आना बाकी है।
खेत पर जबरन जुताई कराने का भी लगाया आरोप कमल ने अपने शिकायती प्रार्थना पत्र में 24 सितंबर 2026 की घटना का भी जिक्र किया है। उनका आरोप है कि जब वह अपने खेत पर पहुंचे तो वहां हल्का लेखपाल और मौजा प्रधान सखौली गांव के राकेश तथा सरमन कुछ अन्य लोगों के साथ मौजूद थे। आरोप है कि इन लोगों ने गाड़ी से पहुंचकर उनकी जमीन पर जबरन जुताई करवा दी।
कमल का कहना है कि उन्होंने इसका विरोध किया और डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी, लेकिन तत्काल विवाद का समाधान नहीं हो सका। पीड़ित के अनुसार, पुलिस ने बाद में मामले को देखने की बात कही। कमल का आरोप है कि इसके बाद से जमीन को लेकर उनकी चिंता और बढ़ गई है।
आईजीआरएस शिकायत में 15 हजार रुपये देने का भी उल्लेख इस प्रकरण से जुड़े आईजीआरएस रिकॉर्ड में शिकायत संख्या 92616000039599 का भी उल्लेख सामने आया है। इसमें कमल शर्मा नामक आवेदक की ओर से आरोप लगाया गया था कि अपनी जमीन की संक्रमणीय भूमिधरी कराने के लिए उन्होंने लेखपाल अक्षय कुमार को 15 हजार रुपये दिए, लेकिन इसके बावजूद उनकी जमीन की संक्रमणीय भूमिधरी नहीं की गई।
उपलब्ध आईजीआरएस विवरण के अनुसार, शिकायत राजस्व एवं आपदा विभाग में दर्ज हुई थी। इसे 3 अक्टूबर 2026 को तहसीलदार तिर्वा के स्तर पर अग्रसारित किए जाने और 2 नवंबर 2026 को निस्तारण की नियत तिथि दर्शाए जाने का उल्लेख है। इस शिकायत और कमल की ओर से लगाए गए 50 हजार रुपये मांगने के आरोप के बीच संबंध तथा दोनों शिकायतों की वास्तविक स्थिति की आधिकारिक पुष्टि होना जरूरी है।
जमीन बेचने का दबाव और मुकदमे में फंसाने की आशंका कमल ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि कुछ ग्रामीणों के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली कि गांव के दीपू प्रधान और श्यामसुंदर पुत्र जागेश्वर उनके खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कराने और एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की कथित साजिश कर रहे हैं। उनका दावा है कि पट्टे की जमीन का बैनामा करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है और ऐसा नहीं करने पर मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जा रही है। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कमल का कहना है कि जिस जमीन पर वह वर्षों से खेती कर अपने पांच बच्चों का पेट पाल रहे हैं, उसी जमीन को लेकर अब उनके सामने तरह-तरह की परेशानियां खड़ी हो रही हैं। पत्नी की मृत्यु और अपनी बीमारी के बीच वह परिवार की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में कृषि भूमि पर अधिकार को लेकर अनिश्चितता उनके लिए बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है।
दोनों पक्षों के दावों के बीच अभिलेखों की जांच जरूरी एक तरफ कमल के पक्ष में वर्ष 2016 के कृषि आवंटन और खतौनी में दर्ज नाम का हवाला दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ श्यामसुंदर आवंटन के समय पात्रता और नियमों के पालन पर सवाल उठा रहे हैं। इसके अलावा आईजीआरएस शिकायत, लेखपाल पर लगाए गए कथित रिश्वत मांगने के आरोप और खेत पर जबरन जुताई की शिकायत ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
अब प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि कृषि भूमि का आवंटन किन परिस्थितियों में हुआ था, आवंटन के समय सभी पात्रता शर्तें पूरी की गई थीं या नहीं, वर्तमान राजस्व अभिलेखों में किसका नाम किस हैसियत से दर्ज है और जमीन पर वास्तविक कब्जा किसका है।
कमल ने 19 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार के नाम प्रार्थना पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच और न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने पुराने आवंटन अभिलेखों, खतौनी, कब्जे और कथित नामांतरण या बैनामे की जांच कराने, भूमिधर अधिकार के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई करने तथा रिश्वत मांगने और खेत पर जबरन हस्तक्षेप करने के आरोपों की जांच कराने की मांग की है।


