घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत चल रहे एक बहुचर्चित पारिवारिक विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। उषा देवी द्वारा अपने पति नागेंद्र कुमार शर्मा एवं अन्य पर लगाए गए आरोपों के मामले में अदालत में लगातार सुनवाई जारी है। न्यायालय में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार मामले में जवाब, अंतरिम भरण-पोषण, एकतरफा कार्यवाही, उसे निरस्त करने के आवेदन तथा अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर सुनवाई चल रही है।
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, कुछ प्रतिवादियों ने अदालत में अपना लिखित जवाब दाखिल करते हुए आरोपों को पूरी तरह निराधार, झूठा और दुर्भावनापूर्ण बताया है। वहीं शिकायतकर्ता पक्ष ने घरेलू हिंसा, मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना, भरण-पोषण तथा मुकदमे के खर्च की मांग को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। मामले में दोनों पक्ष अपने-अपने दावे और दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी दर्ज किया कि कुछ प्रतिवादियों की ओर से समय पर जवाब दाखिल नहीं किया गया, जिस पर अगली तिथि निर्धारित की गई। साथ ही एक प्रतिवादी की एकतरफा कार्यवाही (Ex-Parte) को निरस्त कराने के लिए भी आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिस पर संबंधित पक्ष से जवाब तलब किया गया है।
रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि प्रतिवादियों की ओर से कुछ परिवारजनों के नाम मामले से हटाने के लिए आवेदन दिया गया है। इस आवेदन पर भी न्यायालय ने शिकायतकर्ता पक्ष से जवाब मांगा है। अदालत ने दोनों आवेदनों पर सुनवाई के लिए अगली तिथि निर्धारित कर दी है।
प्रतिवादी पक्ष ने अपने लिखित बयान में दावा किया है कि दहेज मांगने, मारपीट एवं उत्पीड़न के आरोप पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि शिकायतकर्ता शिक्षित हैं और स्वयं आजीविका अर्जित करने में सक्षम हैं। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में दर्ज कुछ मामलों में जांच के दौरान परिवार के अन्य सदस्यों को राहत मिली थी। दूसरी ओर शिकायतकर्ता पक्ष अपने आरोपों पर कायम है और न्यायालय से उचित राहत की मांग कर रहा है।
मामले में एक अन्य याचिका के माध्यम से पारिवारिक न्यायालय के एकपक्षीय आदेश को निरस्त कराने का भी प्रयास किया गया है। इसके साथ ही निष्पादन (Execution) की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग भी अदालत के समक्ष रखी गई है। इन सभी पहलुओं पर न्यायालय में विधिक प्रक्रिया जारी है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि वे लंबे समय से न्याय के लिए अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं। उनका आरोप है कि कानूनी प्रक्रिया लंबी होने के कारण परिवार मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। परिवार ने प्रशासन एवं न्यायिक व्यवस्था से अपील की है कि मामले का निष्पक्ष और समयबद्ध निस्तारण कराया जाए ताकि उन्हें शीघ्र न्याय मिल सके।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में अभी अंतिम निर्णय नहीं आया है। दोनों पक्षों के आरोप और बचाव न्यायालय के विचाराधीन हैं तथा अंतिम सत्य का निर्धारण न्यायालय के आदेश के बाद ही होगा।


