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दहेज प्रताड़ना से परेशान विवाहिता को पुलिस ने समझौते के लिए किया मजबूर? ससुराल पहुंची तो गेट पर ही रोककर भगाया, बेटी के साथ न्याय के लिए दर-दर भटक रही परमशीला

समझौते में पति ने पत्नी और बच्ची को साथ रखने तथा हर महीने 5 हजार रुपये देने का किया था वादा, आरोप है कि ससुराल पक्ष ने घर में घुसने तक नहीं दिया; अब कोर्ट-कचहरी की धमकियां मिलने का भी दावा

चंदौली। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से दहेज प्रताड़ना और घरेलू विवाद का एक गंभीर मामला सामने आया है। चंदौली के अरंगी गांव की रहने वाली विवाहिता परमशीला का आरोप है कि शादी के बाद से ही उसे दहेज की मांग को लेकर लगातार प्रताड़ित किया जाता रहा। पीड़िता का कहना है कि उसने अपने परिवार को बचाने और अपनी छोटी बेटी को पिता का साथ दिलाने के लिए कई बार समझौते का रास्ता अपनाया, लेकिन हर बार उसे निराशा ही हाथ लगी। अब हालात यह हैं कि समझौते में साथ रखने का भरोसा मिलने के बावजूद जब वह अपने ससुराल पहुंची तो उसे घर के अंदर तक प्रवेश नहीं करने दिया गया और कथित तौर पर धमकी देकर वापस भगा दिया गया।

पीड़िता परमशीला के अनुसार उसकी शादी 4 मार्च 2024 को जौनपुर जिले के शाहगंज थाना क्षेत्र के बड़ौना गांव निवासी अनिल बिंद के साथ हुई थी। उसके पति डॉक्टर अनिल कुमार लखनऊ में नौकरी करते हैं। परमशीला का आरोप है कि शादी में उसके मायके वालों ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार टीवी, फ्रिज, सोफा, एसी, सोने की चेन, अंगूठी, बेड और गृहस्थी का अन्य सामान दिया था। इसके अलावा करीब 10 लाख रुपये की गाड़ी भी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद ससुराल पक्ष संतुष्ट नहीं था। पीड़िता का आरोप है कि ससुराल वालों की ओर से 12 लाख रुपये की गाड़ी अथवा उसके बदले नकद रकम की मांग की जा रही थी। इसी मांग को लेकर शादी के शुरुआती दिनों से ही उसे मानसिक रूप से परेशान किया जाने लगा।

परमशीला का कहना है कि शादी के बाद वह बनारस में नर्सिंग का काम करती थी। नौकरी के कारण वह कुछ समय तक परिवार से अलग रहती थी, इसलिए शुरुआत में उसे प्रताड़ना की गंभीरता का पूरी तरह अंदाजा नहीं हो पाया। बाद में जब वह गर्भवती हुई और मायके में बनारस के अस्पताल में उसकी डिलीवरी हुई तो बेटी के जन्म के बाद ससुराल पक्ष के व्यवहार में कथित तौर पर और बदलाव आ गया। पीड़िता का आरोप है कि बेटी के जन्म पर ससुराल वाले खुश नहीं थे और अस्पताल में ही बच्ची को लेकर आपत्तिजनक बातें कही गईं।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में बच्ची की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि जब बेटी करीब पांच महीने की थी, तब उसे ससुराल बुलाया गया। वहां बच्ची को दही में कपड़े की बत्ती बनाकर मुंह में डालने का आरोप लगाया गया। इससे बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी और उल्टियां होने लगीं। परमशीला के अनुसार उसने तत्काल बच्ची के मुंह से कपड़े की बत्ती निकाली, लेकिन परिवार के कुछ सदस्य कथित तौर पर उससे संबंधित सामग्री लेकर वहां से चले गए। उसने पति के भाइयों और अन्य रिश्तेदारों पर भी बच्ची को नुकसान पहुंचाने की कोशिश का आरोप लगाया है। इसके अलावा उसका कहना है कि उसे खाने में अधिक मिर्च और नमक मिलाकर दिया जाता था तथा जरूरत के समय भोजन और अन्य सामान भी छिपा दिया जाता था। इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

लगातार विवाद और कथित प्रताड़ना से परेशान होकर परमशीला ने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। उसकी शिकायत संख्या 40019626014816 बताई गई है। मामला महिला कल्याण विभाग के अंतर्गत दहेज से पीड़ित महिलाओं को आर्थिक एवं कानूनी सहायता की श्रेणी में भी दर्ज हुआ। पीड़िता के मुताबिक उसने पुलिस और संबंधित अधिकारियों के समक्ष भी अपनी परेशानी रखी, लेकिन उसे अब तक स्थायी राहत नहीं मिल सकी।

परमशीला का आरोप है कि 6 अगस्त 2026 को दिए गए ऑनलाइन प्रार्थना पत्र के बाद दोनों पक्षों को कन्दवा थाने बुलाया गया था। वहां कुछ संभ्रांत लोगों की मौजूदगी में बातचीत कराकर समझौता कराया गया। समझौते में पति की ओर से पत्नी को अपने साथ रखने, भविष्य में किसी प्रकार की मारपीट या प्रताड़ना नहीं करने, पत्नी और बच्ची की उचित देखभाल करने तथा हर महीने 5 हजार रुपये देने की बात स्वीकार किए जाने का उल्लेख है। पीड़िता का कहना है कि बच्ची के भविष्य और परिवार बचाने की उम्मीद में उसे यह समझौता स्वीकार करना पड़ा। हालांकि उसका आरोप है कि पुलिस ने कथित दबाव बनाकर उससे समझौता कराया और वास्तविक समस्या का समाधान किए बिना मामला निपटाने की कोशिश की।

समझौते के बाद परमशीला को उम्मीद थी कि अब उसका परिवार फिर से बस जाएगा, लेकिन उसके आरोपों के अनुसार 23 सितंबर 2026 को जब वह अपने पिता मगन राम और भाई बाबूलाल के साथ ससुराल बड़ौना पहुंची तो वहां स्थिति फिर बिगड़ गई। वह अपने कपड़े, जेवरात और अन्य निजी सामान लेने गई थी, लेकिन आरोप है कि ससुराल पक्ष के लोगों ने उसे घर के अंदर प्रवेश तक नहीं करने दिया। उसके पिता और भाई को भी कथित तौर पर गेट से ही लौटा दिया गया। पीड़िता का कहना है कि सास सुनीता देवी, ससुर बरखूराम और परिवार के अन्य सदस्यों ने उसे सामान लेने से रोक दिया तथा कोर्ट-कचहरी के चक्कर में फंसाने की धमकी देकर वहां से भगा दिया। इस तरह समझौते में किए गए वादों के बावजूद उसे न तो ससुराल में रहने दिया गया और न ही अपना सामान और जेवरात वापस मिल सके।

पीड़िता ने परिवार के अन्य सदस्यों के नामों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया है कि पति के छोटे भाइयों चंदन और सुनील तथा परिवार की अन्य महिलाओं की ओर से भी उसे परेशान किया जाता था। उसका कहना है कि पति की ओर से भी उसे साथ रखने को लेकर स्पष्ट सहयोग नहीं मिल रहा है। परमशीला के मुताबिक उसकी छोटी बेटी काव्य की उम्र करीब एक वर्ष तीन महीने है और वह अपनी बच्ची के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित है। पति के लखनऊ में नौकरी करने के कारण वह वहां भी अपने परिवार के साथ रहने की उम्मीद लेकर पहुंची थी, लेकिन आरोप है कि वहां भी उसे गार्ड के माध्यम से वापस भगा दिया गया।

परमशीला का कहना है कि वह पुलिस, जनसुनवाई पोर्टल और अन्य संबंधित अधिकारियों के यहां लगातार आवेदन देकर न्याय की गुहार लगा रही है। इसके बावजूद उसकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। उसका आरोप है कि एक ओर समझौते में पत्नी और बच्ची को साथ रखने तथा हर महीने आर्थिक सहायता देने का भरोसा दिया गया, वहीं दूसरी ओर जब वह अपने अधिकार और अपना सामान लेने पहुंची तो उसे घर में घुसने तक नहीं दिया गया। अब वह अपनी बेटी के साथ मायके में रहने को मजबूर है।

पीड़िता ने प्रशासन और महिला कल्याण विभाग से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, समझौते की शर्तों के पालन की स्थिति स्पष्ट की जाए, उसे उसके निजी कपड़े, जेवरात और अन्य सामान वापस दिलाया जाए तथा दहेज प्रताड़ना और बच्ची की सुरक्षा से जुड़े आरोपों की गंभीरता से जांच की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि उसे और उसकी बच्ची को किसी प्रकार की धमकी या प्रताड़ना का सामना न करना पड़े। परमशीला का कहना है कि वह अब न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है और चाहती है कि प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप कर उसे न्याय दिलाए।