Become a member

Get the best offers and updates relating to Liberty Case News.

― Advertisement ―

spot_img
HomeNewsपेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे 12 वर्षीय बच्चे को सांप...

पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे 12 वर्षीय बच्चे को सांप काटने का इंजेक्शन लगाने का आरोप, हालत बिगड़ी तो गले का ऑपरेशन किया; इलाज में 4 लाख खर्च, परिवार ने बेचा घर

लखनऊ/उन्नाव। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान कथित चिकित्सकीय लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। पेट दर्द की शिकायत होने पर 12 वर्षीय बच्चे को अस्पताल लेकर पहुंचे गरीब परिवार का आरोप है कि डॉक्टरों ने पेट दर्द का इलाज करने के बजाय उसे सांप काटने के उपचार में इस्तेमाल होने वाला इंजेक्शन लगा दिया। इसके बाद बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। आरोप है कि बच्चे की सांस लेने में परेशानी होने पर उसके गले का ऑपरेशन कर सांस लेने के लिए नली डालनी पड़ी। परिवार का दावा है कि लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद बच्चे की हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इलाज के खर्च के लिए परिवार को अपना घर तक बेचना पड़ा। अब मां अपने बेटे के इलाज और न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रही है।

पीड़िता जुबैदा पत्नी अली हुसैन निवासी ग्राम इनायतपुर बर्रा, थाना औरास, जिला उन्नाव ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और मुख्य चिकित्सा अधिकारी लखनऊ को शिकायत भेजकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। शिकायत के अनुसार, उनका करीब 12 से 13 वर्षीय बेटा फिरोज पेट दर्द की शिकायत से परेशान था। परिजन उसे 19 सितंबर 2026 को लखनऊ स्थित हेल्थ होप हॉस्पिटल, पृथ्वी पैलेस, निकट रेलवे क्रॉसिंग, बुद्धेश्वर, रिंग रोड में इलाज के लिए लेकर पहुंचे थे। परिवार का आरोप है कि अस्पताल में बच्चे का इलाज सही तरीके से नहीं किया गया और पेट दर्द की शिकायत के बावजूद उसे सांप काटने के उपचार में इस्तेमाल होने वाला इंजेक्शन लगा दिया गया। इसके बाद बच्चे की तबीयत और बिगड़ गई।

जुबैदा का आरोप है कि बच्चे की हालत बिगड़ने के बाद अस्पताल के डॉक्टरों ने उसके गले का ऑपरेशन किया और सांस लेने के लिए नली डाल दी। परिवार के मुताबिक, बच्चे की हालत इतनी गंभीर हो गई थी कि वह कई दिनों तक होश में नहीं आया। शिकायत में दावा किया गया है कि इंजेक्शन लगाए जाने के करीब छह दिन बाद बच्चे को होश आया, लेकिन इसके बाद भी उसकी स्थिति सामान्य नहीं हुई। परिजनों का कहना है कि अब भी बच्चा परिवार के सदस्यों को ठीक से पहचान नहीं पा रहा है। एक मां के लिए अपने मासूम बेटे को इस हालत में देखना बेहद दर्दनाक है।

परिवार ने अस्पताल पर इलाज और दवाइयों के नाम पर भारी रकम वसूलने का भी आरोप लगाया है। शिकायत में जुबैदा ने बताया कि अस्पताल में इलाज के दौरान उनसे 2 लाख 59 हजार रुपये से अधिक वसूले गए। वहीं, परिवार का कहना है कि अलग-अलग खर्चों को मिलाकर इलाज पर करीब चार लाख रुपये तक खर्च हो चुके हैं। आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के कारण परिवार के पास इलाज जारी रखने के लिए पैसे नहीं बचे थे। आरोप है कि अस्पताल में बच्चे की हालत में सुधार नहीं होने के बावजूद डिस्चार्ज करने के नाम पर 25 हजार रुपये अतिरिक्त मांगे गए और रकम लेने के बाद ही उसे अस्पताल से छुट्टी दी गई। परिजनों का यह भी आरोप है कि उन्हें समुचित डिस्चार्ज कार्ड तक उपलब्ध नहीं कराया गया।

सबसे दुखद पहलू यह है कि इस परिवार में फिरोज इकलौता बेटा है और उसकी चार बहनें भी हैं। परिवार के मुताबिक, बेटियों की उम्र भी 20 वर्ष से कम है। बेटे के इलाज और अस्पताल के खर्चों को पूरा करने के लिए जुबैदा और उनके परिवार को अपना घर तक बेचना पड़ा। घर बिक जाने के बाद पूरा परिवार आर्थिक संकट में फंस गया है। परिवार के सामने रहने और खाने-पीने तक की समस्या खड़ी हो गई है। एक तरफ बेटे की गंभीर हालत है तो दूसरी तरफ इलाज के लिए लगातार बढ़ता खर्च परिवार को कर्ज और आर्थिक तंगी की ओर धकेल रहा है।

परिजनों का कहना है कि हेल्थ होप हॉस्पिटल में इलाज से राहत नहीं मिलने के बाद वे फिरोज को लेकर हरदोई जिले के संडीला स्थित ओम हॉस्पिटल पहुंचे। यहां डॉक्टरों से जानकारी मिलने के बाद परिवार को कथित रूप से पता चला कि पहले अस्पताल में बच्चे को सांप काटने के उपचार वाला इंजेक्शन लगाया गया था। इसके बाद से परिवार लगातार इलाज कराने और बच्चे की जान बचाने की कोशिश में जुटा है। फिलहाल बच्चे का इलाज जारी बताया जा रहा है। मां जुबैदा का कहना है कि उनके पास अब इतने पैसे भी नहीं बचे हैं कि वे लंबे समय तक बेटे का इलाज करा सकें।

इस मामले को लेकर जुबैदा ने उपमुख्यमंत्री और मुख्य चिकित्सा अधिकारी लखनऊ से लिखित शिकायत कर अस्पताल के डॉक्टरों और संबंधित स्टाफ के खिलाफ निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में अस्पताल के खिलाफ गलत इलाज, कथित अवैध वसूली और बच्चे की गंभीर हालत के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई गई है। परिवार चाहता है कि इलाज के नाम पर वसूली गई रकम वापस दिलाई जाए और बच्चे के आगे के उपचार की निशुल्क व्यवस्था कराई जाए।