पीड़ित परिवार का आरोप- मारपीट के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद आरोपियों की धमकियां जारी, युवती की शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने से परिवार दहशत में; एसपी से लेकर प्रशासन तक लगाई न्याय की गुहार
भदोही। उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के थाना कोईरौना क्षेत्र के ग्राम छेछुआ में पुरानी मुकदमेबाजी की रंजिश को लेकर एक परिवार के साथ मारपीट, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और घर में घुसकर युवती के साथ कथित छेड़छाड़ का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि गांव के कुछ लोगों द्वारा पहले भी उनके साथ मारपीट की गई थी, जिसके संबंध में थाना कोईरौना में मुकदमा दर्ज है। इसके बावजूद आरोपियों के हौसले कम नहीं हुए और परिवार को लगातार डराने-धमकाने का सिलसिला जारी है। पीड़ित परिवार अब पुलिस और जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहा है।
प्राप्त शिकायती प्रार्थना पत्रों के अनुसार, ग्राम छेछुआ निवासी झल्लर हरिजन पुत्र श्रीराम ने आरोप लगाया है कि 6 जनवरी 2026 की शाम करीब 7 बजे पुरानी रंजिश को लेकर अजय पुत्र जोखन, जोखन पुत्र बाउल, गुलशन तथा रतीश पुत्र राजकुमार सहित अन्य लोगों ने उनके परिवार के साथ विवाद शुरू कर दिया। आरोप है कि विपक्षीगण एकजुट होकर गाली-गलौज करने लगे और विरोध करने पर झल्लर, उनकी पत्नी कौशिल्या तथा पुत्री कोमल के साथ लाठी-डंडों, लात-घूंसों से मारपीट की। इस घटना में परिवार के सदस्यों को चोटें आईं। पीड़ित का कहना है कि आरोपित जाते समय जान से मारने की धमकी भी देकर गए।
पीड़ित परिवार के मुताबिक, घटना के संबंध में पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन शुरुआत में उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। बाद में इस मामले में थाना कोईरौना में अपराध संख्या 6/2026 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। परिवार का आरोप है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद भी आरोपियों की तरफ से रंजिश और धमकियों का सिलसिला बंद नहीं हुआ।
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया, जब पीड़ित परिवार ने 7 फरवरी 2026 की घटना का आरोप लगाते हुए अलग से शिकायत की। कौशिल्या पत्नी झल्लर का कहना है कि उस दिन लकड़ी को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि गांव के अजय, प्रदीप, जोखन, रतीश और बरुण सहित अन्य लोग एकजुट होकर उनके साथ मारपीट करने लगे। अपनी जान बचाने के लिए वह वहां से भागीं और डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को कटरा पुलिस चौकी आने के लिए कहा। कौशिल्या के अनुसार, वह पुलिस चौकी पहुंच गईं, लेकिन दूसरे पक्ष के लोग वहां नहीं आए।
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप उनकी पुत्री कोमल के साथ हुई कथित घटना को लेकर लगाया गया है। कौशिल्या का कहना है कि जब वह पुलिस चौकी पर थीं, उसी दौरान उनकी पुत्री घर के बाहर मौजूद थी। आरोप है कि इसी बीच प्रदीप ने कोमल का हाथ जबरन पकड़कर उसे जमीन पर गिरा दिया और उसके कपड़े फाड़ते हुए गलत नीयत से छेड़छाड़ करने की कोशिश की। युवती के शोर मचाने पर परिवार की जेठानी की बहू तालू सहित अन्य लोग मौके पर पहुंचे और उसे बचाया। आरोप है कि इसके बाद आरोपी धमकी देते हुए वहां से चले गए कि इस बार तो बच गई, लेकिन आगे नहीं बच पाओगी। घटना की जानकारी कोमल ने फोन पर अपनी मां को दी।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इस घटना की जानकारी पुलिस को देने के बावजूद उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया और युवती के साथ हुई कथित घटना की प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। परिवार का कहना है कि उन्होंने 12 फरवरी 2026 को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से पुलिस अधीक्षक भदोही को भी शिकायत भेजी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अब तक अपेक्षित न्याय नहीं मिल सका।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपित परिवार की महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक धमकियां दे रहे हैं। कथित तौर पर कहा जा रहा है कि यदि परिवार ने मुकदमे में पैरवी जारी रखी तो वे परिवार की महिलाओं की इज्जत से खिलवाड़ करेंगे और परिवार को गांव छोड़कर दूसरी जगह बसने के लिए मजबूर कर देंगे। इन धमकियों से पूरा परिवार भयभीत है। पीड़ित परिवार को आशंका है कि आरोपियों द्वारा भविष्य में उनके साथ कोई गंभीर वारदात की जा सकती है।
इसी मामले से जुड़ा एक अन्य गंभीर आरोप झल्लर हरिजन ने मेडिकल परीक्षण में लापरवाही को लेकर लगाया है। उनका कहना है कि 6 जनवरी 2026 की मारपीट में उनकी आंख और दांत में गंभीर चोटें आई थीं, लेकिन मुकदमा दर्ज होने के बावजूद उनका समुचित मेडिकल परीक्षण नहीं कराया गया। इस संबंध में उन्होंने 11 जनवरी 2026 को प्रशासन के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। आरोप है कि अपर जिलाधिकारी भदोही के निर्देश पर 14 जनवरी 2026 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी भदोही को मेडिकल परीक्षण कराने के लिए पत्र भेजा गया और सीएमओ कार्यालय में भी शिकायत दर्ज हुई।
पीड़ित के अनुसार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय ने 22 जनवरी 2026 को महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय ज्ञानपुर में मेडिकल परीक्षण कराने का आदेश दिया था। आरोप है कि वह पुलिस के साथ अस्पताल पहुंचे, लेकिन दिनभर इंतजार करने के बावजूद गठित चिकित्सकीय टीम ने उनका मेडिकल परीक्षण नहीं किया। इसके बाद 29 जनवरी को दोबारा मेडिकल बोर्ड गठित कर परीक्षण कराने का निर्देश दिया गया। पीड़ित का कहना है कि वह उस दिन भी अस्पताल पहुंचे, लेकिन उनका परीक्षण नहीं हुआ। तीसरी बार 30 जनवरी 2026 को भी अस्पताल पहुंचने के बावजूद उन्हें बिना मेडिकल परीक्षण के लौटना पड़ा।
झल्लर का आरोप है कि आंख में लगी चोट के कारण उनकी दृष्टि लगातार प्रभावित हो रही है और समय पर मेडिकल परीक्षण तथा उचित इलाज नहीं मिलने से उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर निर्देश जारी होने के बावजूद अस्पताल में तीन बार बुलाए जाने के बाद भी मेडिकल परीक्षण नहीं किया जाना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल मेडिकल बोर्ड गठित कर चोटों का परीक्षण कराने और समुचित इलाज की व्यवस्था कराने की मांग की है।
पीड़ित परिवार ने अपनी शिकायत में पुराने विवादों और अन्य घटनाओं का भी जिक्र किया है। परिवार के मुताबिक, 29 अक्टूबर 2025 को उनके घर के दरवाजे पर खड़ी एचएफ डीलक्स मोटरसाइकिल को एक अज्ञात व्यक्ति दवा दिलाने का बहाना बनाकर लेकर फरार हो गया था। इस संबंध में भी पुलिस को शिकायत दी गई थी। परिवार का कहना है कि लगातार अलग-अलग घटनाओं और मुकदमेबाजी के कारण उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि वे लंबे समय से न्याय पाने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। परिवार की महिलाओं और युवती की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। उनका आरोप है कि यदि समय रहते शिकायतों पर निष्पक्ष जांच और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो कोई बड़ी घटना हो सकती है।
अब पीड़ित झल्लर हरिजन और उनकी पत्नी कौशिल्या ने पुलिस अधीक्षक भदोही तथा जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, युवती के साथ कथित छेड़छाड़ और धमकी की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने, परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा आंख और दांत की चोटों का तत्काल मेडिकल परीक्षण और उचित इलाज कराने की मांग की है। पीड़ित परिवार का कहना है कि वे बेहद परेशान हैं और चाहते हैं कि उनकी फरियाद पर समय रहते सुनवाई हो, ताकि उन्हें और उनके परिवार की महिलाओं को सुरक्षा मिल सके तथा दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो सके।


