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आजमगढ़ में जमीन और नाली विवाद ने पकड़ा तूल: पुलिस पर दीवार बनवाने और चार आम के पेड़ कटवाकर बेचने का गंभीर आरोप

आजमगढ़। तरवा थाना क्षेत्र के तितरा चानकपुर गांव में जमीन, नाली और पेड़ों को लेकर चल रहा विवाद अब पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारियों तक पहुंच गया है। गांव निवासी धुरभारी चौहान की ओर से दिए गए शिकायती पत्रों और ऑल इंडिया एंटी करप्शन कमेटी की ओर से भेजे गए पत्रों में पुलिसकर्मियों तथा दूसरे पक्ष के लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में आरोप है कि पैतृक जमीन और पानी निकासी की नाली को लेकर विवाद के बीच दूसरे पक्ष ने कथित तौर पर दीवार खड़ी कर रास्ता प्रभावित किया, जबकि पुलिस पर पीड़ित पक्ष की शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं करने और दूसरे पक्ष को संरक्षण देने के आरोप लगाए गए हैं।

शिकायतकर्ता धुरभारी चौहान के अनुसार वह तितरा चानकपुर गांव का मूल निवासी है। उसके अनुसार कपिलदेव चौहान और धुरभारी चौहान दोनों सगे भाई हैं और जमीन में बराबर के हिस्सेदार हैं। शिकायत में आराजी संख्या 349 और 350 का उल्लेख करते हुए दावा किया गया है कि जमीन की पैमाइश भी हो चुकी है और लेखपाल की ओर से संबंधित हिस्से को चिन्हित किया गया था। इसके बावजूद विवादित पक्ष द्वारा कथित तौर पर धुरभारी के हिस्से की ओर करीब दो फीट जमीन में हस्तक्षेप कर दीवार बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

नाली के रास्ते को लेकर बढ़ा विवाद

धुरभारी चौहान का कहना है कि उसके हिस्से की जमीन और पंपिंगसेट से खेती तक पानी पहुंचाने वाली नाली को लेकर विवाद है। शिकायत के मुताबिक दूसरे पक्ष की ओर से पानी की निकासी के लिए पाइप लगाने या पक्की नाली बनाने की बात कही गई, लेकिन विवाद का स्थायी समाधान नहीं हो सका। इसी विवाद के चलते दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ने की बात शिकायत में कही गई है।

पुलिस पर दीवार बनवाने में सहयोग का आरोप

ऑल इंडिया एंटी करप्शन कमेटी की ओर से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ सहित अन्य अधिकारियों को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि पुलिस उपनिरीक्षक सिंधीलाल सोनकर ने अपने पद का कथित दुरुपयोग करते हुए कपिलदेव चौहान की दीवार बनवाने में सहयोग किया। शिकायत में दावा किया गया है कि 2 जुलाई 2026 को 112 नंबर पर पुलिस सहायता मांगी गई थी, लेकिन मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने पीड़ित पक्ष की बात सुनने के बजाय उसे कथित रूप से डांटकर वहां से भगा दिया।

शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि पुलिस से मदद मांगने के बावजूद विवादित स्थल पर उसकी शिकायत के अनुरूप कार्रवाई नहीं की गई। इसी वजह से परिवार ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य प्रशासनिक स्तर पर शिकायतें भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

चार हरे आम के पेड़ कटवाकर बेचने का भी आरोप

मामले में सबसे गंभीर आरोप धुरभारी चौहान के चार हरे-भरे आम के पेड़ों को कटवाकर बेचने से जुड़ा है। शिकायत में इन पेड़ों की अनुमानित कीमत करीब दो लाख रुपये बताई गई है। आरोप लगाया गया है कि पेड़ों को कथित तौर पर 56 हजार रुपये में आरा मशीन संचालक किशुन सोनकर को बेच दिया गया और प्राप्त रकम को संबंधित लोगों के बीच बांट लिया गया।

शिकायत में इस मामले में मिथिलेश चौहान, सुभाष भारद्वाज लेखपाल, थाना प्रभारी चंद्रदीप कुमार, कपिलदेव चौहान तथा आरा मशीन संचालक किशुन सोनकर समेत अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग की गई है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

रिश्वत लेने के भी लगाए गए गंभीर आरोप

शिकायतकर्ता की ओर से दिए गए एक अन्य आवेदन में पुलिस उपनिरीक्षक सिंधीलाल सोनकर पर रिश्वत लेने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायत में अलग-अलग रकम का उल्लेख करते हुए दावा किया गया है कि विवाद के समाधान के नाम पर पैसे लिए गए, लेकिन इसके बावजूद नाली और जमीन के विवाद का कोई समाधान नहीं कराया गया। यह आरोप भी शिकायतकर्ता के दस्तावेजों पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

तूफान में पेड़ गिरने के बाद फिर सामने आया मामला

20 जून 2026 को भेजे गए एक पत्र में 9 जून 2026 की घटना का भी उल्लेख है। पत्र के अनुसार तितरा चानकपुर गांव में धुरभारी चौहान के घर पर तूफान के दौरान एक पेड़ गिर गया था। पीड़ित द्वारा कथित तौर पर 112 नंबर पर फोन कर पुलिस सहायता मांगी गई और पेड़ हटाने के लिए मदद की मांग की गई। ऑल इंडिया एंटी करप्शन कमेटी की ओर से थाना तरवा के प्रभारी को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया कि पीड़ित को घर से पेड़ हटाने में अपेक्षित पुलिस और अग्निशमन सहायता नहीं दी गई।

पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि पुलिस पर दूसरे पक्ष के प्रभाव में काम करने का संदेह है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। संगठन ने पीड़ित के घर पर गिरे पेड़ को तत्काल हटवाने में सहायता उपलब्ध कराने की मांग की थी।

मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारियों तक पहुंची शिकायत

लगातार शिकायतों के बाद मामला वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़, सहायक पुलिस आयुक्त लालगंज, थाना तरवा समेत उच्च स्तर के अधिकारियों तक भेजा गया है। एक पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम भी भेजे जाने का उल्लेख दस्तावेजों में है। इसमें पीड़ित को न्याय दिलाने के साथ कथित रूप से लापरवाही या पद के दुरुपयोग में शामिल अधिकारियों की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की गई है।

जांच के बाद साफ होगी आरोपों की वास्तविकता

मामले में शिकायतकर्ता पक्ष ने जमीन की पैमाइश, नाली, दीवार, पेड़ों की कटाई, कथित धमकी और पुलिस की भूमिका से जुड़े दस्तावेज एवं फोटो उपलब्ध होने का दावा किया है। अब पूरे मामले में राजस्व अभिलेखों, जमीन की पैमाइश, नाली की वास्तविक स्थिति, पेड़ों की कटाई और बिक्री तथा संबंधित पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण होगी। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह लंबे समय से परेशान है और चाहता है कि प्रशासन मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करे।