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स्वर्गीय चाचा ससुर जगदीश से पूछकर बनवाया सरकारी शौचालय, 5 साल बाद विवाद में तोड़फोड़ का आरोप; पूजा बोलीं- मनोज को जमीन से बेदखल करने के बाद भी जमीन बची, विजेंद्र को देने का विवाद

हापुड़। जिले के सपनावत गांव से जमीन और सरकारी शौचालय को लेकर करीब पांच साल से चले आ रहे विवाद का मामला सामने आया है। गांव निवासी पूजा का आरोप है कि उन्होंने अपने स्वर्गीय चाचा ससुर जगदीश से अनुमति लेकर घर के पास सरकारी योजना के तहत शौचालय का निर्माण कराया था। अब जमीन को लेकर विवाद खड़ा होने के बाद उनके शौचालय को तोड़कर नुकसान पहुंचाया गया है। पूजा का कहना है कि नुकसान के बाद भी उन्हें इसकी भरपाई नहीं दी जा रही है।

पूजा के अनुसार, उनके चाचा ससुर जगदीश अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनके निधन से पहले जमीन और शौचालय निर्माण को लेकर उनसे बातचीत की गई थी। पूजा का कहना है कि जगदीश की सहमति के बाद ही उन्होंने सरकारी योजना के तहत शौचालय का निर्माण कराया था। इसके बाद परिवार लगातार उसका इस्तेमाल करता रहा।

पीड़िता का आरोप है कि पिछले करीब पांच वर्षों से जमीन को लेकर विवाद चला आ रहा है। पूजा के अनुसार, स्वर्गीय जगदीश के बेटे मनोज को जमीन से बेदखल किए जाने के बाद भी जमीन का कुछ हिस्सा बचा हुआ है। आरोप है कि मनोज को जमीन से बेदखल किए जाने के बावजूद बची हुई जमीन को विजेंद्र को दिए जाने की बात सामने आई है। इसी जमीन को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।

पूजा का कहना है कि जमीन से जुड़े विवाद के बीच उनके द्वारा बनवाए गए सरकारी शौचालय को भी तोड़कर क्षतिग्रस्त कर दिया गया। उनका आरोप है कि शौचालय का निर्माण उन्होंने स्वर्गीय जगदीश की सहमति से कराया था, ऐसे में उसे तोड़े जाने से उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ है।

पीड़िता के अनुसार, शौचालय सरकारी योजना के तहत बनाया गया था और परिवार के लिए जरूरी सुविधा थी। शौचालय क्षतिग्रस्त होने के बाद परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पूजा का कहना है कि नुकसान होने के बावजूद उन्हें अब तक किसी तरह की भरपाई नहीं मिली है।

पूजा ने आरोप लगाया कि स्वर्गीय जगदीश के बेटे मनोज को जमीन से बेदखल किए जाने के बाद भी जमीन का हिस्सा बचा हुआ है और इसी बची हुई जमीन को विजेंद्र को देने को लेकर विवाद पैदा हुआ है। पीड़िता चाहती हैं कि प्रशासन जमीन से जुड़े सभी दस्तावेजों और अधिकारों की जांच कर पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे।

हालांकि, जमीन मनोज से बेदखल किए जाने, बची हुई जमीन विजेंद्र को दिए जाने तथा शौचालय तोड़े जाने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले में संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

पूजा का कहना है कि उन्होंने करीब पांच वर्षों से चल रहे इस विवाद में काफी परेशानी झेली है। उनका कहना है कि उन्होंने शौचालय निर्माण के लिए पहले ही स्वर्गीय चाचा ससुर जगदीश की सहमति ली थी। ऐसे में अब शौचालय को नुकसान पहुंचाए जाने से हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई मिलनी चाहिए।

पीड़िता ने प्रशासन से मांग की है कि जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि स्वर्गीय जगदीश की जमीन में वर्तमान में किसका अधिकार है, मनोज को बेदखल किए जाने के बाद कितनी जमीन शेष है और उस जमीन को विजेंद्र को दिए जाने का आधार क्या है। साथ ही सरकारी योजना के तहत बने शौचालय को क्षतिग्रस्त किए जाने की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए।

पूजा का कहना है कि उनकी लड़ाई विवाद बढ़ाने की नहीं, बल्कि अपने हुए नुकसान का न्यायपूर्ण समाधान पाने की है। उन्होंने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर जमीन विवाद और शौचालय को हुए नुकसान की निष्पक्ष जांच कराने तथा आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई और नुकसान की भरपाई कराने की मांग की है।