भारत ने संयुक्त राष्ट्र में जम्मू-कश्मीर को अभिन्न अंग बताते हुए पाकिस्तान पर झूठ फैलाने और PoK में मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया है। सांसद प्रिया सरोज ने UN अधिकारियों के गलत आचरण पर जवाबदेही और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की।
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को घेरा, कहा- ‘जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।’
महिमा कुमारी मेवाड़ ने पाकिस्तानी कब्जे वाले इलाकों में मानवाधिकार उल्लंघन और नागरिकों की हत्या का मुद्दा उठाया।
प्रिया सरोज ने UN अधिकारियों के अपराधों पर जवाबदेही, निष्पक्ष जांच और पीड़ितों-गवाहों की सुरक्षा मजबूत करने की मांग की।
संयुक्त राष्ट्र: भारत ने संयुक्त राष्ट्र में जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न अंग बताते हुए पाकिस्तान पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया। सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा उठाया। वहीं, सांसद प्रिया सरोज ने संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के गलत कामों पर जवाबदेही तय करने और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाने की मांग की। बता दें कि भारत ने कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान को आतंकवाद के प्रति उसकी पॉलिसी के लिए लताड़ लगाई थी।
कश्मीर पर पाकिस्तान को भारत की दो टूक
न्यूयॉर्क में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा की चौथी समिति में ‘उपनिवेशवाद से मुक्ति’ विषय पर चर्चा हुई। इस दौरान भारत की ओर से सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने पाकिस्तान के बयान का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह अफसोस की बात है कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के मंच का गलत इस्तेमाल कर जम्मू-कश्मीर को लेकर झूठ और भ्रामक बातें फैला रहा है। UN में भारत के आधिकारिक X अकाउंट पर की गई एक पोस्ट में बताया गया कि महिमा कुमारी मेवाड़ ने चौथी समिति में पाकिस्तान के प्रतिनिधि के बयान के जवाब में भारत की ओर से अपना पक्ष रखा।
पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में मानवाधिकार का मुद्दा उठाया
महिमा कुमारी मेवाड़ ने पाकिस्तान से उसके कब्जे वाले इलाकों में मानवाधिकारों के गंभीर और लगातार हो रहे उल्लंघन को रोकने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन इलाकों की जनता पाकिस्तानी सेना के कब्जे, दमन, क्रूरता और संसाधनों के गैरकानूनी दोहन के खिलाफ खुलकर विरोध कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तानी सशस्त्र बलों और उनके सहयोगियों ने अपने बुनियादी अधिकारों, आजादी और जरूरी सुविधाओं की मांग कर रहे दर्जनों निर्दोष नागरिकों की हत्या की है।
भारत ने पाकिस्तान के राजनीतिक रिकॉर्ड पर भी उठाए सवाल
महिमा कुमारी मेवाड़ ने पाकिस्तान के राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी रिकॉर्ड की आलोचना करते हुए कहा कि वहां सैन्य तानाशाही, दिखावटी चुनाव, लोकप्रिय निर्वाचित नेताओं को जेल में डालने, धार्मिक कट्टरपंथ और सरकारी नीति के तौर पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे रिकॉर्ड वाले देश को संयुक्त राष्ट्र के इस मंच पर दूसरों को उपदेश देने से बचना चाहिए। भारत ने जम्मू-कश्मीर पर अपना रुख दोहराते हुए साफ-साफ कहा,
‘जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा।’
UN अधिकारियों के गलत कामों पर जवाबदेही तय करने की मांग
इसी बीच, संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की छठी समिति में भारत ने संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और मिशन पर तैनात विशेषज्ञों के आपराधिक कृत्यों और गलत आचरण के लिए जवाबदेही मजबूत करने की मांग की। इस समिति में भारत की ओर से सांसद प्रिया सरोज ने राष्ट्रीय वक्तव्य दिया। भारत के आधिकारिक एक्स अकाउंट के मुताबिक, प्रिया सरोज ने UN के कर्मचारियों के आपराधिक आचरण के प्रति भारत की बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने की नीति दोहराई। उन्होंने UN और सदस्य देशों के बीच बेहतर सहयोग, जवाबदेही की प्रभावी व्यवस्था और पीड़ितों व गवाहों की सुरक्षा को जरूरी बताया।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों का भारत ने किया स्वागत
प्रिया सरोज ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र महासचिव की उन कोशिशों की सराहना करता है, जिनका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और मिशन पर तैनात विशेषज्ञों के आपराधिक कृत्यों के लिए जवाबदेही की व्यवस्था मजबूत करना है। उन्होंने महासभा के प्रस्ताव 80/160 के तहत पेश की गई रिपोर्ट A/81/207 और A/81/284 का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आपराधिक कृत्यों के लिए जवाबदेही तय करना संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता और ईमानदारी बनाए रखने के लिए जरूरी है।
एक साल में 93 मामलों की जांच के लिए भेजा गया रेफरल
प्रिया सरोज ने बताया कि 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2026 के बीच संयुक्त राष्ट्र के कानूनी मामलों के कार्यालय ने 93 अधिकारियों और मिशन पर तैनात विशेषज्ञों से जुड़े 93 मामले उनकी राष्ट्रीयता वाले देशों को जांच और संभावित मुकदमे के लिए भेजे। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि मामले भेजे जाने के बाद समय पर कार्रवाई हो और संयुक्त राष्ट्र तथा सदस्य देशों के बीच प्रभावी सहयोग बना रहे। उन्होंने देशों से अपील की कि वे इन मामलों की जल्द जांच करें और जहां जरूरी हो, मुकदमा चलाएं। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र को कार्रवाई की जानकारी भी देते रहें।
विदेश में अपराध करने वाले नागरिकों पर भी कार्रवाई हो
प्रिया सरोज ने सदस्य देशों से यह विचार करने की अपील की कि संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी या मिशन विशेषज्ञ के तौर पर काम करने वाले उनके नागरिक विदेश में गंभीर अपराध करें, तो उनके खिलाफ अपने देश में कार्रवाई करने के अधिकार को कैसे मजबूत किया जा सकता है। यह व्यवस्था संबंधित देश के राष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जवाबदेही तय करते समय सभी संबंधित लोगों के अधिकारों और उचित कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करना भी जरूरी है। पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा के साथ-साथ प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों जैसे रोकथाम के उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
प्रिया सरोज ने भारतीय कानूनों का भी दिया हवाला
प्रिया सरोज ने भारत के घरेलू कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 में भारतीय नागरिकों की ओर से भारत के बाहर किए गए कुछ अपराधों से संबंधित प्रावधान हैं। वहीं, प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962 में लागू परिस्थितियों के अनुसार किसी व्यक्ति को दूसरे देश को सौंपने की कानूनी व्यवस्था है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों के आपराधिक कृत्यों और गलत आचरण के प्रति भारत की शून्य-सहनशीलता नीति दोहराई। साथ ही, यौन शोषण और दुर्व्यवहार के पीड़ितों की मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के ट्रस्ट फंड में लगातार योगदान देने के महत्व पर जोर दिया।


