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19 महीने से वेतन का इंतजार, शिक्षिका बोलीं दोषमुक्त होने के बाद भी विभाग ने नहीं दिया वेतन; आदेशों के बावजूद कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर

जांच में कार्रवाई के बाद कोर्ट से मिली राहत, योगदान भी कराया गया; वेतन भुगतान के लिए अधिकारियों ने दिए निर्देश, फिर भी फाइलों में उलझा मामला

सीतामढ़ी जिले के सन्नी सैदपुर प्रखंड में कार्यरत एक प्रखंड शिक्षिका ने शिक्षा विभाग पर वेतन भुगतान के नाम पर जानबूझकर परेशान करने का आरोप लगाया है। शिक्षिका का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया में दोषमुक्त होने और दोबारा योगदान कराए जाने के बावजूद पिछले 19 महीनों से उन्हें वेतन नहीं मिला है। आर्थिक संकट से जूझ रही शिक्षिका ने जिला पदाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप कर वेतन भुगतान कराने की गुहार लगाई है।

शिक्षिका के आवेदन के अनुसार वह 4 दिसंबर 2006 को प्रखंड शिक्षिका के पद पर नियुक्त हुई थीं। निगरानी जांच के क्रम में 18 फरवरी 2019 को उनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इसके बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा। शिक्षिका का कहना है कि सीजेएम न्यायालय, सीतामढ़ी में जीआर संख्या 4022/2018 स्टेट बनाम रेखा कुमारी मामले में 21 जुलाई 2024 को आदेश पारित करते हुए उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया।

न्यायालय के आदेश के बाद शिक्षिका ने विभागीय स्तर पर दोबारा योगदान की प्रक्रिया शुरू की। उनके अनुसार प्रखंड नियोजन समिति की बैठक आयोजित की गई और 20 दिसंबर 2024 को उनका योगदान स्वीकार कर लिया गया। इसकी सूचना जिला स्तर के अधिकारियों को भी पत्रांक 2642, दिनांक 20 दिसंबर 2024 के माध्यम से दी गई थी।

शिक्षिका का दावा है कि इसके बाद भी वेतन भुगतान का रास्ता साफ नहीं हुआ। जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय की ओर से पत्रांक 1823, दिनांक 18 जुलाई 2025 के माध्यम से जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया। इसके बाद जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना कार्यालय की ओर से भी 23 फरवरी 2026 को पत्रांक 1551 के माध्यम से प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, सन्नी सैदपुर को वेतन भुगतान का आदेश दिए जाने की बात आवेदन में कही गई है।

इसके बावजूद शिक्षिका का आरोप है कि संबंधित कार्यालयों के बीच पत्राचार चलता रहा, लेकिन उनके खाते में वेतन नहीं पहुंचा। उनका कहना है कि एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेजे जा रहे पत्रों के कारण वह लगातार परेशान हो रही हैं। कई स्तरों पर आदेश जारी होने के बाद भी वेतन भुगतान नहीं होने से अब उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

शिक्षिका ने जिला पदाधिकारी से कहा है कि लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। उन्होंने अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी करने और बकाया वेतन का भुगतान कराने की मांग की है।

आवेदन में शिक्षिका ने न्यायालय से दोषमुक्त होने, दोबारा योगदान स्वीकार किए जाने और वेतन भुगतान के लिए विभागीय पत्र जारी होने का हवाला देते हुए कहा है कि इसके बाद भी भुगतान नहीं होना उनके लिए बड़ी परेशानी का कारण बना हुआ है। अब उनकी नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।

हालांकि, वेतन भुगतान में देरी के विभागीय कारणों और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। शिक्षिका द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हो सकी है।