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बस्ती की मां-बेटी की संघर्ष गाथा: सीमित संसाधनों के बीच सोशल मीडिया पर पहचान बनाने की जंग

बस्ती (उत्तर प्रदेश)। बस्ती जिले के रामपुर गांव की रहने वाली 35 वर्षीय गीता देवी अपनी 11 वर्षीय बेटी जूही कुमारी के साथ सोशल मीडिया की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद मां-बेटी की यह जोड़ी पिछले दो वर्षों से यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार वीडियो बनाकर अपने हुनर को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है।

गीता देवी का कहना है कि सफलता परिस्थितियों की मोहताज नहीं होती, बल्कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से हर सपना साकार किया जा सकता है। इसी सोच के साथ वह अपनी बेटी जूही कुमारी के साथ रोज नए-नए विषयों पर रचनात्मक और मनोरंजक वीडियो तैयार करती हैं। दोनों की मेहनत, समर्पण और जुनून उनके हर वीडियो में साफ दिखाई देता है।

गांव के साधारण परिवेश से निकलकर सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाना आसान नहीं है, लेकिन गीता देवी ने कभी आर्थिक या सामाजिक चुनौतियों को अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया। वह घर की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के साथ वीडियो की कहानी तैयार करती हैं, शूटिंग करती हैं और फिर उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करती हैं। उनकी बेटी जूही भी पूरे उत्साह के साथ अभिनय कर अपनी मां का पूरा सहयोग करती है।

वर्तमान में उनके यूट्यूब चैनल “Juhi Kumari 08” पर लगभग 95 सब्सक्राइबर और 557 वीडियो हैं। भले ही अभी उनकी पहुंच सीमित हो, लेकिन उनका हौसला और लगातार काम करने का जज्बा उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मां-बेटी की यह जोड़ी अपने वीडियो के माध्यम से सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश देने का प्रयास करती है। दोनों का सपना है कि एक दिन उनके वीडियो देशभर में पसंद किए जाएं और वे अपनी मेहनत के दम पर एक अलग पहचान बना सकें।

गीता देवी का मानना है कि यदि परिवार का सहयोग, आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत बनी रहे तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। वह चाहती हैं कि उनकी बेटी अपने हुनर के दम पर आगे बढ़े, समाज में नाम कमाए और दूसरों के लिए प्रेरणा बने।

गीता देवी और जूही कुमारी की संघर्ष यात्रा आज उन हजारों लोगों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का साहस रखते हैं।