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चीनी के दाम ने बढ़ाई मिठास की टेंशन! जिस साल ज्यादा स्टॉक की थी उम्मीद, उसी में क्यों अचनाक बढ़ गए रेट?

त्योहारों का सीजन शुरू होते ही चीनी की कीमतों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। देश के बड़े शहरों में चीनी करीब दो हफ्ते पहले के मुकाबले लगभग 40% महंगी हो गई है। खास बात यह है कि इसी साल की शुरुआत में भारत में चीनी की भारी उपलब्धता और संभावित सरप्लस की उम्मीद थी।
त्योहारों का सीजन शुरू होते ही देश में चीनी की कीमतों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जिस चीनी की इस साल भरपूर उपलब्धता की उम्मीद की जा रही थी, वही अब कई बड़े शहरों में करीब 40% तक महंगी हो गई है। बाजार में अचानक सप्लाई की कमी के बीच सरकार को भी घरेलू स्टॉक सुरक्षित रखने के लिए कई बड़े कदम उठाने पड़े हैं। सवाल है कि आखिर जिस साल चीनी का सरप्लस अनुमान लगाया गया था, वह अचानक दाम क्यों बढ़ने लगे?

शुरुआत में था बंपर उत्पादन का अनुमान
2025-26 के चीनी सीजन की शुरुआत 1 अक्टूबर 2025 को हुई थी। शुरुआत में इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने करीब 34.90 मिलियन टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया था। यह पिछले साल के 29.6 मिलियन टन से करीब 18% ज्यादा था। इस अनुमान के आधार पर माना गया कि घरेलू खपत पूरी करने के बाद भी पर्याप्त चीनी बचेगी। सरकार ने भी नवंबर 2025 में 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दे दी। फरवरी में 5 लाख टन और निर्यात की मंजूरी दी गई।

धीरे-धीरे बदलने लगा पूरा गणित
समय बीतने के साथ चीनी उत्पादन के अनुमान लगातार घटते गए। नवंबर में अनुमान 34.35 मिलियन टन, फरवरी में 32.4 मिलियन टन और अप्रैल में 32 मिलियन टन कर दिया गया। अब सरकार का अनुमान है कि इस सीजन में कुल उत्पादन करीब 30.6 मिलियन टन रहेगा। इसमें से करीब 2.9 मिलियन टन एथनॉल बनाने में इस्तेमाल होगा और लगभग 8 लाख टन चीनी का निर्यात हो चुका है। ऐसे में घरेलू खपत के लिए उपलब्ध मात्रा करीब 26.9 मिलियन टन रह जाती है, जबकि देश की सालाना खपत लगभग 28.5 मिलियन टन है।

महाराष्ट्र और कर्नाटक में फसल को नुकसान
उत्पादन में गिरावट की सबसे बड़ी वजह प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में गन्ने की पैदावार और रिकवरी कम होना रही। महाराष्ट्र और कर्नाटक में मौसम संबंधी समस्याओं के साथ फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों तथा ज्यादा बारिश से जलभराव का असर पड़ा। AISTA ने भी मार्च में अपने अनुमान को घटाकर 28.3 मिलियन टन कर दिया था।

चीनी की कीमतों में अचानक उछाल
जून के आखिर से चीनी की एक्स-मिल कीमतें बढ़ने लगीं। अगस्त के पहले सप्ताह में महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में कीमत करीब 4,880-4,980 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई। 18 अगस्त को यह 5,350 रुपये और अगले ही दिन उत्तर प्रदेश में करीब 5,850 रुपये प्रति 100 किलो हो गई। कुछ मिलों में 20 अगस्त को कीमत 7,100 रुपये प्रति 100 किलो तक पहुंचने की खबर सामने आई।

सरकार ने उठाए कई बड़े कदम
कीमतों और सप्लाई पर दबाव बढ़ने के बाद सरकार ने चीनी के स्टॉक पर कंट्रोल कड़ा किया। बड़े औद्योगिक खरीदारों को सितंबर से अपनी जरूरत के 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा सरकार ने करीब एक दशक बाद चीनी आयात का रास्ता भी खोला। 20 अगस्त को 10 लाख टन चीनी आयात की अनुमति दी गई और 100% आयात शुल्क हटा दिया गया।

क्या त्योहारों में चीनी की कमी होगी?
सरकार का कहना है कि फिलहाल घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और पिछले साल का बचा बफर स्टॉक भी उपलब्धता बनाए रखने में मदद करेगा। हालांकि, उत्पादन अनुमान में बार-बार हुई कटौती और त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली मांग ने बाजार की चिंता जरूर बढ़ा दी है।