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13 सितंबर को पटना में जुटेंगे पंचायत रोजगार सेवक, लंबित मानदेय से सेवा सुरक्षा तक उठेंगे मुद्दे; बड़े आंदोलन की रणनीति पर होगा मंथन

पटना। बिहार के पंचायत रोजगार सेवक अपने अधिकार, सम्मान, सेवा सुरक्षा और बेहतर भविष्य की मांग को लेकर 13 सितंबर 2026 को राजधानी पटना में जुटेंगे। रविवार को बिहार राज्य पंचायत परिषद भवन, विद्यापति मार्ग में पंचायत रोजगार सेवकों का सम्मेलन और स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में रोजगार सेवकों के कार्यक्रम में पहुंचने की संभावना है। सम्मेलन में रोजगार सेवकों की समस्याओं पर चर्चा के साथ आगामी संघर्ष और आंदोलन की दिशा तय किए जाने की बात कही गई है।

कार्यक्रम सुबह 11 बजे से शुरू होगा। आयोजन स्थल बिहार राज्य पंचायत परिषद भवन, विद्यापति मार्ग, पटना बताया गया है, जो पटना तारामंडल के सामने और पुराने म्यूजियम यानी जादू घर के पीछे स्थित है। आयोजकों का कहना है कि यह सम्मेलन पंचायत रोजगार सेवकों के लिए अपनी समस्याओं और मांगों को सामूहिक रूप से रखने का महत्वपूर्ण मंच होगा।

लंबित मानदेय और भुगतान का मुद्दा प्रमुख

पंचायत रोजगार सेवकों की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार सम्मेलन में सबसे प्रमुख मुद्दों में लंबित मानदेय और विभिन्न कार्यों के भुगतान की समस्या शामिल है। रोजगार सेवकों का कहना है कि भुगतान में देरी के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा सेवा सुरक्षा और भविष्य की स्थिरता को लेकर भी सम्मेलन में गंभीर चर्चा की जाएगी।

ऑनलाइन काम और बढ़ते कार्यभार पर भी चर्चा

रोजगार सेवकों के सामने मैदानी स्तर पर काम के बढ़ते दबाव और तकनीकी तथा प्रशासनिक समस्याओं को लेकर भी सवाल उठाए जाने की तैयारी है। सम्मेलन में NMMS सहित अन्य ऑनलाइन कार्यों में आने वाली कठिनाइयों, कार्यों के क्रियान्वयन के दौरान तकनीकी दिक्कतों और प्रशासनिक स्तर पर आने वाली परेशानियों पर चर्चा की जाएगी।

आयोजकों का कहना है कि पंचायत रोजगार सेवक ग्रामीण स्तर पर विभिन्न योजनाओं और कार्यों से जुड़े दायित्वों का निर्वहन करते हैं। ऐसे में उनके कार्यभार, जिम्मेदारियों और उपलब्ध संसाधनों के बीच संतुलन का मुद्दा भी सम्मेलन में प्रमुखता से उठाया जाएगा।

आगामी आंदोलन की रणनीति पर मंथन

स्थापना दिवस समारोह को केवल संगठनात्मक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखने की बात कही गई है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार रोजगार सेवकों के सामूहिक हित में आगे की संघर्ष रणनीति पर विचार किया जाएगा। सम्मेलन में आगामी आंदोलन और विशेष संघर्ष कार्यक्रम की घोषणा किए जाने की संभावना भी जताई गई है।

आयोजकों ने कहा है कि रोजगार सेवकों की समस्याओं और मांगों को लेकर सभी साथियों को एक मंच पर आने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से व्यक्तिगत मतभेद और संगठनात्मक मनमुटाव को पीछे छोड़कर सामूहिक हित में एकजुट होने का आह्वान किया गया है।

बिहार के हजारों रोजगार सेवकों की आवाज बनने का दावा

आयोजकों का कहना है कि सम्मेलन के माध्यम से बिहार के पंचायत रोजगार सेवकों की सामूहिक शक्ति को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा। रोजगार सेवकों के अधिकार, सम्मानजनक जीवन, सेवा सुरक्षा और बेहतर भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर संगठनात्मक रणनीति तैयार की जाएगी।

मीडिया से कवरेज की अपील

आयोजकों ने प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल मीडिया, वेब पोर्टल और स्वतंत्र पत्रकारों से सम्मेलन में पहुंचकर कवरेज करने की अपील की है। उनका कहना है कि मीडिया के माध्यम से रोजगार सेवकों की वास्तविक समस्याओं, मांगों और भविष्य की रणनीति को शासन, प्रशासन और आम जनता तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

13 सितंबर को होने वाले इस सम्मेलन में रोजगार सेवकों को अपनी समस्याएं सीधे रखने और सामूहिक रूप से आगे की दिशा तय करने का अवसर मिलेगा। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सम्मेलन में किन मांगों को प्रमुखता दी जाती है और आगामी आंदोलन को लेकर संगठन की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है।