मानवाधिकार आयोग में पहुंचा मामला, आयोग ने पुलिस से रिपोर्ट तलब करने के बाद शिकायत को किया निस्तारित; फर्रुखाबाद में कथित उत्पीड़न, मारपीट और कार्रवाई नहीं होने को लेकर पीड़ित ने फिर लगाई न्याय की गुहार
फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश। जिले के फतेहगढ़ क्षेत्र निवासी बालिस्टर सिंह पुत्र सोबरन सिंह ने पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए अपने साथ कथित उत्पीड़न, मारपीट और लगातार परेशान किए जाने के आरोप लगाए हैं। बालिस्टर सिंह का दावा है कि वह लंबे समय से विभिन्न अधिकारियों और पुलिस थानों में शिकायतें देकर न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके द्वारा दिए गए एक हजार से अधिक प्रार्थना पत्रों और शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उनके और कुछ लोगों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। उन्होंने कुछ लोगों पर संगठित तरीके से परेशान करने, धमकाने, झूठी सूचनाएं देने और उनके कामकाज में बाधा उत्पन्न करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका यह भी आरोप है कि उनके आसपास संदिग्ध गतिविधियां होती हैं और उन्हें लगातार भयभीत करने का प्रयास किया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बालिस्टर सिंह ने अपने प्रार्थना पत्र में चोरी, मारपीट, धमकी, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर अपराधों की आशंका जताते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई करने तथा दोषियों के विरुद्ध जांच के बाद उचित कानूनी कदम उठाने की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने 2 जून 2026 की रात करीब नौ बजे कोतवाली रोड स्थित कपहरी तिराहा के पास आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर के नजदीक कथित मारपीट की घटना का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि कुछ लोगों ने उनके साथ अभद्रता और मारपीट की तथा उन्हें चोट पहुंचाई। उन्होंने इस मामले में कोतवाली फतेहगढ़ के प्रभारी निरीक्षक को शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा मामला
इस पूरे प्रकरण में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का दस्तावेज भी सामने आया है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, बालिस्टर सिंह की शिकायत आयोग में डायरी संख्या 129529/CR/2025 के तहत 11 नवंबर 2025 को दर्ज हुई थी। मामले की फाइल संख्या 22780/24/25/2025 दर्शाई गई है।
आयोग के उपलब्ध कार्रवाई विवरण के मुताबिक, शिकायत में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने और अधिकारियों की कथित निष्क्रियता का मुद्दा उठाया गया था। आयोग ने संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद अधिकारियों की ओर से रिपोर्ट प्राप्त हुई, जिसमें बताया गया कि संबंधित मामलों में एफआईआर दर्ज की गई हैं। आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करने के बाद शिकायतकर्ता की एफआईआर दर्ज नहीं होने संबंधी मूल शिकायत का समाधान हुआ मानते हुए 16 जून 2026 को मामले को निस्तारित कर दिया और आगे की कार्रवाई आवश्यक नहीं बताई।
हालांकि, बालिस्टर सिंह का कहना है कि उनकी अन्य शिकायतों और कथित उत्पीड़न से जुड़े मुद्दों का समाधान अभी भी नहीं हुआ है। वह चाहते हैं कि उनके द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
कैमरे लगाने और अन्य शिकायतों पर भी कार्रवाई की मांग
बालिस्टर सिंह ने जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारियों को दिए गए प्रार्थना पत्रों में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाने की मांग किए जाने का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि इस संबंध में अधिकारियों को आवेदन देने के बावजूद उनकी मांग पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कुछ दुकानों, संस्थानों और कथित अतिक्रमण को लेकर भी प्रशासन से जांच कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने संबंधित स्थानों पर नियमों के अनुसार जांच कर अतिक्रमण पाए जाने पर वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि उनके प्रार्थना पत्रों पर गलत रिपोर्ट लगाए जाने से उन्हें न्याय पाने में परेशानी हो रही है।
निष्पक्ष जांच की मांग
बालिस्टर सिंह ने पुलिस अधीक्षक, जिलाधिकारी और कोतवाली फतेहगढ़ के अधिकारियों से मांग की है कि उनके द्वारा दिए गए सभी प्रार्थना पत्रों और उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। कथित मारपीट की घटना, धमकी और अन्य शिकायतों की अलग-अलग जांच कराकर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।


