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मऊगंज में जमीन के नक्शे में गड़बड़ी का आरोप, 2023 से राजस्व विवाद में भटक रहा परिवार; न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर पीड़ित

हनुमना में आराजी नंबर 467/9 के नक्शा संशोधन का मामला, पड़ोसी पर जमीन पर कब्जे की कोशिश का आरोप; एसडीओ ने जांच रिपोर्ट मांगी

मऊगंज। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के हनुमना तहसील क्षेत्र में जमीन के नक्शे में कथित गड़बड़ी और भूमि विवाद का मामला सामने आया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उनकी जमीन का नक्शा वास्तविक स्थिति से अलग दर्शाया गया है, जिससे पड़ोसी के साथ विवाद बढ़ता जा रहा है। परिवार का दावा है कि वर्ष 2023 से यह मामला चला आ रहा है, लेकिन कई जगह आवेदन देने के बावजूद अब तक उन्हें राहत नहीं मिली है। पीड़ित परिवार का कहना है कि जमीन को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है और उन्हें आशंका है कि नक्शे में कथित गड़बड़ी का फायदा उठाकर उनकी भूमि पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। परिवार ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक सीमाओं का निर्धारण करने और समय रहते न्याय दिलाने की मांग की है।

प्राप्त राजस्व दस्तावेज के अनुसार, कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी, अनुभाग हनुमना की ओर से 29 सितंबर 2026 को राजस्व निरीक्षक वृत्त पिपराही, तहसील हनुमना, जिला मऊगंज को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के संबंध में पत्र जारी किया गया था। पत्र में हरिलाल कोल पुत्र गलबल कोल, निवासी ग्राम बन्ना जवाहर सिंह की ओर से आराजी क्रमांक 467/9 के नक्शे में सुधार के लिए आवेदन प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख है। इस मामले में राजस्व निरीक्षक को जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे।

दस्तावेज में निर्देश दिया गया था कि संबंधित भूमि के सीमावर्ती काश्तकारों की उपस्थिति में नक्शा संशोधन का प्रस्ताव तैयार कर निर्धारित पेशी से पहले प्रस्तुत किया जाए। पत्र में 22 अक्टूबर 2026 से पहले रिपोर्ट प्रस्तुत करने का उल्लेख है, जबकि पेशी की तारीख 22 दिसंबर 2026 दर्ज की गई है। इसकी प्रतिलिपि तहसीलदार हनुमना और नायब तहसीलदार वृत्त पिपराही को भी सूचनार्थ भेजे जाने का उल्लेख है। इससे स्पष्ट है कि भूमि के नक्शे में संशोधन का मामला राजस्व विभाग के स्तर पर विचाराधीन रहा है। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेज से अंतिम निर्णय या नक्शा संशोधन की कार्रवाई पूरी होने की पुष्टि नहीं होती।

पीड़ित पक्ष का कहना है कि जिस स्थान पर उनकी जमीन स्थित है, राजस्व नक्शे में उसकी स्थिति सही तरीके से प्रदर्शित नहीं हो रही है। उनका आरोप है कि जमीन की वास्तविक स्थिति और नक्शे में दर्ज विवरण के बीच अंतर होने से विवाद पैदा हो रहा है। परिवार का दावा है कि इस स्थिति के कारण उनकी भूमि की सीमा को लेकर परेशानी बढ़ गई है और उन्हें अपनी जमीन सुरक्षित रहने की चिंता सता रही है। पीड़ित पक्ष चाहता है कि राजस्व अधिकारी मौके पर पहुंचकर भूमि का निरीक्षण करें और अभिलेखों के आधार पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें।

पीड़ित पक्ष ने पड़ोसी सुरेंद्र सिंह, जिन्हें ठाकुर बताया गया है, पर जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया है। परिवार के अनुसार, यह विवाद वर्ष 2023 से चला आ रहा है और अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है। पीड़ित का आरोप है कि नक्शे में कथित गड़बड़ी के कारण दूसरे पक्ष को फायदा मिल सकता है। हालांकि, जमीन पर कब्जे की कोशिश और नक्शे में जानबूझकर गड़बड़ी किए जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस संबंध में दूसरे पक्ष का बयान भी उपलब्ध नहीं है।

परिवार का कहना है कि भूमि विवाद के चलते वे लंबे समय से मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं। उनका आरोप है कि उन्होंने अपनी समस्या के समाधान के लिए अलग-अलग अधिकारियों के समक्ष आवेदन दिए, लेकिन उन्हें अब तक अपेक्षित राहत नहीं मिली। पीड़ित पक्ष चाहता है कि मामले को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए, बल्कि मौके पर सीमांकन और राजस्व अभिलेखों की जांच कराई जाए, ताकि जमीन की वास्तविक सीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके और भविष्य में किसी तरह का विवाद न बढ़े।

इस मामले में अनुविभागीय अधिकारी की ओर से राजस्व निरीक्षक को जांच प्रतिवेदन तैयार करने के निर्देश दिए जाने के बाद अब राजस्व विभाग की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सीमावर्ती काश्तकारों की मौजूदगी में नक्शा संशोधन का प्रस्ताव तैयार करने से जमीन की सीमा और अभिलेखों की स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अंतिम निर्णय संबंधित राजस्व अभिलेखों, मौके की जांच और सक्षम अधिकारी की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।

पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि आराजी क्रमांक 467/9 के मामले में निष्पक्ष जांच कराई जाए, वास्तविक भूमि सीमा का निर्धारण किया जाए और नक्शे में यदि कोई त्रुटि पाई जाती है तो नियमानुसार सुधार किया जाए। परिवार चाहता है कि उनकी शिकायत पर समयबद्ध कार्रवाई हो, जमीन को लेकर चल रहे विवाद का समाधान निकले और किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।