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एक साल बाद जन्म पंजीयन के लिए परिवार भटक रहा, प्रशासनिक प्रक्रिया में फंसा मामला; मदद की गुहार

राजस्थान में जन्म पंजीयन से जुड़ी निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद एक परिवार प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर है। परिवार का आरोप है कि बच्चे के जन्म का समय पर पंजीयन नहीं हो सका और अब एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए शपथ पत्र, दस्तावेज और अधिकारियों के आदेश की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ रही है। इसके बावजूद सुनवाई नहीं होने से परिवार परेशान है और प्रशासन से मदद की मांग कर रहा है।

परिवार की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार, एक वर्ष से अधिक समय बाद जन्म की सूचना देने की स्थिति में जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) तथा राजस्थान जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम, 2000 के नियम 9(3) के तहत कार्यपालक मजिस्ट्रेट से आदेश प्राप्त करने की प्रक्रिया बताई गई है। इसके लिए आवेदक को शपथ पत्र में बच्चे का नाम, जन्म तिथि, जन्म स्थान, माता-पिता का नाम, स्थायी और वर्तमान पता सहित अन्य आवश्यक विवरण देने होते हैं।

शपथ पत्र के प्रारूप में यह भी उल्लेख है कि बच्चे का जन्म अस्पताल के बजाय घर पर हुआ था और उक्त जन्म का पंजीयन इससे पहले किसी रजिस्ट्रार या उपरजिस्ट्रार कार्यालय में नहीं कराया गया है। साथ ही जन्म प्रमाण पत्र पहले जारी नहीं होने की घोषणा भी की जाती है। आवेदक द्वारा बच्चे तथा माता-पिता से संबंधित आवश्यक दस्तावेज संलग्न करने और शपथ पत्र पर वर्तमान फोटो लगाने की बात भी निर्धारित प्रारूप में कही गई है।

दस्तावेजों में आगे यह प्रक्रिया बताई गई है कि आवेदन और संलग्न दस्तावेजों के आधार पर घटना की सत्यता का सत्यापन किया जाना है। इसके बाद संबंधित अधिकारी द्वारा स्थानीय रजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु को जन्म का पंजीयन करने के लिए आदेश जारी किया जा सकता है। परिवार का कहना है कि कागजी प्रक्रिया और दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद संबंधित स्तर पर उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।

परिजनों का आरोप है कि वे अपनी समस्या को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों में लगातार संपर्क कर रहे हैं, लेकिन उन्हें स्पष्ट समाधान नहीं मिल रहा। परिवार का कहना है कि जन्म प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज के अभाव में बच्चे से जुड़े कई सरकारी और शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से वे चाहते हैं कि संबंधित अधिकारी मामले की जांच कर नियमानुसार जन्म पंजीयन की कार्रवाई पूरी कराएं।

परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि उनके दस्तावेजों की जांच कर यदि सभी तथ्य सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार जन्म पंजीयन की प्रक्रिया पूरी कर जन्म प्रमाण पत्र जारी कराया जाए। परिजनों का कहना है कि वे लंबे समय से परेशान हैं और अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं बल्कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।

इस मामले में संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आवेदन में कौन-कौन सी प्रक्रिया लंबित है और जन्म पंजीयन में देरी का वास्तविक कारण क्या है। परिवार ने उच्च अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप कर शीघ्र समाधान कराने की गुहार लगाई है।