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80 बकरियां चोरी होने के बाद अब मकान पर कब्जे का आरोप, 25 साल पुराने घर को गिराकर निर्माण करने का दावा; पीड़ित संतोष ने प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार

सागर में न्याय के लिए तहसील और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काट रहा परिवार, रायसेन के बेगमगंज निवासी गोपाल भरले पर मकान कब्जाने का आरोप; बकरियों के नुकसान की भरपाई और अपनी संपत्ति वापस दिलाने की मांग*

सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें एक परिवार ने पहले अपनी आजीविका का बड़ा सहारा मानी जाने वाली 80 बकरियां चोरी होने और बाद में पुश्तैनी मकान पर कब्जा किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित संतोष का कहना है कि वर्षों पहले हुई बकरियों की चोरी के कारण परिवार को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। अब आरोप है कि उनकी गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर उनके पुराने मकान को गिरा दिया गया और जमीन पर अवैध रूप से निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि लगातार शिकायतें करने के बावजूद अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है।

पीड़ित संतोष के अनुसार, करीब 1999-2000 के दौरान उनकी लगभग 80 बकरियां चोरी हो गई थीं। इस मामले में रायसेन जिले के बेगमगंज निवासी गोपाल भरले का नाम सामने आने की बात पीड़ित ने कही है। संतोष का दावा है कि बकरियां उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन थीं। इतनी बड़ी संख्या में बकरियां चोरी होने से परिवार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ और उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया। पीड़ित का कहना है कि उस समय से लेकर आज तक उन्हें इस नुकसान की भरपाई नहीं मिल सकी है।

पीड़ित की परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई। संतोष का आरोप है कि वर्ष 2024 में गोपाल भरले ने उनके पुराने मकान पर कब्जा कर लिया। जब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई तो कथित तौर पर सामने वाले पक्ष ने जमीन खरीदने की बात कही। संतोष का कहना है कि उन्हें न तो जमीन की खरीद-बिक्री की कोई जानकारी दी गई और न ही ऐसे किसी दस्तावेज या प्रमाण के बारे में बताया गया, जिसके आधार पर उनकी संपत्ति पर किसी दूसरे व्यक्ति का अधिकार बनता हो। पीड़ित का दावा है कि उनका वर्षों पुराना मकान और उससे जुड़ी संपत्ति उनके परिवार की है, लेकिन अब उन्हें ही अपनी जगह वापस पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

इस मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों में ग्राम पेखलोन निवासी शांतिबाई, पत्नी स्वर्गीय गंगाराम धानक, के पुराने मकान और जमीन को लेकर भी गंभीर विवाद का उल्लेख मिलता है। पंचनामा दिनांक 21 जुलाई 2024 में पंचों ने उल्लेख किया है कि शांतिबाई लगभग 25 वर्ष पहले अपने पति गंगाराम धानक के साथ ग्राम पेखलोन में मंदिर के पास निवास करती थीं। वहां उनका मकान था। पति की मृत्यु के बाद वह अपने बच्चों को लेकर भोपाल चली गई थीं। दस्तावेज में गंगाराम धानक के पिता का नाम गोविंद धानक और माता का नाम नर्मदाबाई दर्ज है।

शांतिबाई की ओर से प्रस्तुत शपथपत्र और आवेदन में भी मकान पर कब्जे तथा निर्माण को लेकर आपत्ति जताई गई है। उनके कथन के अनुसार, परिवार के भरण-पोषण का साधन नहीं होने के कारण वह बच्चों को लेकर दूसरे स्थान पर चली गई थीं। वर्ष 2015 में सुखदेवता की पूजा के लिए पेखलोन पहुंचने पर उन्होंने अपने पुराने मकान को कच्ची अवस्था में, आसपास पेड़-पौधों और चबूतरे के साथ देखा था। लेकिन 12 जून को दोबारा गांव पहुंचने पर कथित तौर पर मकान गिरा हुआ मिला और पेड़ काटकर वहां अनधिकृत निर्माण कार्य किया जा रहा था। विरोध करने पर गाली-गलौज और धमकी दिए जाने का आरोप भी आवेदन में लगाया गया है।

पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस पूरे विवाद को लेकर कई बार तहसीलदार कार्यालय सहित संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिवार का आरोप है कि उनकी शिकायतों पर गंभीरता से सुनवाई नहीं की जा रही है और मामला लगातार लंबित रखा जा रहा है। उनका कहना है कि एक तरफ 80 बकरियों के चोरी होने से आर्थिक नुकसान हुआ, वहीं दूसरी तरफ मकान और जमीन को लेकर विवाद ने परिवार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

अब संतोष ने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन किया जाए और यदि अवैध कब्जा या निर्माण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही चोरी हुई 80 बकरियों के कारण हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई दिलाने और उनकी संपत्ति वापस दिलाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।

परिवार का कहना है कि लगातार परेशानियों के कारण उनकी आर्थिक और मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही है। अब उनकी उम्मीद प्रशासन से है कि मामले को गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जांच कराई जाए, संबंधित पक्षों के दस्तावेजों की पड़ताल हो और उन्हें समय रहते न्याय मिल सके। पीड़ित परिवार ने शासन-प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान कर उन्हें उनका हक दिलाया जाए।