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राजस्व न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद निर्माण जारी रहने का आरोप, संतोष पटेल ने लगाया अधिकारियों की अनदेखी का आरोप; दिन-रात पक्का मकान बनाने का काम चलने से न्याय की गुहार

सीधी/सिहावल। मध्य प्रदेश के सीधी जिले की सिहावल तहसील अंतर्गत ग्राम बेलगांव में जमीन विवाद का मामला अब राजस्व न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने के आरोपों के कारण चर्चा में है। ग्राम उफरौली निवासी संतोष कुमार पटेल पिता शम्भू प्रसाद पटेल ने आरोप लगाया है कि उनकी भूमि से जुड़े विवाद में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सिहावल (SDM) द्वारा 16 अक्टूबर 2026 को स्थगन आदेश जारी किया गया था। इसके बावजूद संबंधित भूमि पर दिन और रात में पक्का मकान बनाने का काम लगातार किया जा रहा है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि आदेश जारी होने के बाद भी मौके पर निर्माण कार्य नहीं रुकने से उन्हें अपनी जमीन और कानूनी अधिकारों को लेकर चिंता सता रही है।

प्राप्त न्यायालयीन दस्तावेजों के अनुसार, यह मामला न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सिहावल, जिला सीधी में राजस्व मामला क्रमांक 353/अपील/2026-27 के रूप में दर्ज है। इसमें संतोष कुमार पटेल अपीलार्थी हैं, जबकि भोला प्रसाद पटेल पिता उजागिर पटेल सहित अन्य लोगों को उत्तरवादी बनाया गया है। विवाद ग्राम बेलगांव की आराजी क्रमांक 129/1/1/1, रकबा 0.1540 हेक्टेयर तथा आराजी क्रमांक 129/1/1/2, रकबा 0.0960 हेक्टेयर भूमि से संबंधित है। अपीलार्थी की ओर से न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर आरोप लगाया गया था कि संबंधित भूमि पर जबरन अतिक्रमण करते हुए उनके कब्जे वाले भू-भाग पर नवीन पक्के मकान का निर्माण कराया जा रहा है।

दस्तावेजों के मुताबिक, विवादित भूमि से संबंधित अधीनस्थ न्यायालय नायब तहसीलदार, तहसील सिहावल के राजस्व प्रकरण क्रमांक 17/अ-70/2026-27 में 9 जुलाई 2026 को आदेश पारित किया गया था। इसके बाद अपीलार्थी की ओर से मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 44(1) के अंतर्गत अपील के साथ धारा 52/32 के तहत आवेदन प्रस्तुत कर निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की गई। आवेदन पर दोनों पक्षों के मामले से संबंधित दलीलों पर विचार करते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सिहावल ने 16 अक्टूबर 2026 को स्थगन आदेश जारी किया।

न्यायालय के आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ग्राम बेलगांव स्थित दोनों आराजियों पर उत्तरवादी द्वारा किए जा रहे नवीन पक्के निर्माण कार्य के संबंध में सीमांकन कराकर प्रतिवेदन आने तक स्थगन आदेश प्रभावी रहेगा। साथ ही, दोनों पक्षों को मौके पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली पेशी 23 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। आदेश की प्रतिलिपि तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार सिहावल, थाना प्रभारी अमिलिया, पुलिस चौकी सिहावल तथा संबंधित पटवारी हल्का को सूचना और आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजे जाने का उल्लेख भी दस्तावेज में है। पटवारी हल्का को सात दिनों के भीतर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि, संतोष कुमार पटेल का आरोप है कि एसडीएम (राजस्व) सिहावल के स्थगन आदेश के बावजूद भोला प्रसाद पटेल आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं और जमीन पर निर्माण कार्य नहीं रुक रहा है। उनका कहना है कि दिन के साथ-साथ रात में भी काम जारी है और उनकी शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। दिनांक 16 अक्टूबर 2026 को पुलिस ने मौके पर निरीक्षण कर भोला प्रसाद पटेल को निर्माण कार्य तत्काल रोकने का निर्देश दिया था, लेकिन निर्देश के बावजूद निर्माण कार्य जारी है। संतोष कुमार पटेल ने आरोप लगाया है कि भोला प्रसाद पटेल ने करीब 20 मजदूर लगाकर बिना किसी संकोच के दिन-रात पक्का मकान बनवाया जा रहा है, जिससे स्पष्ट है कि एसडीएम के स्थगन आदेश का उल्लंघन किया जा रहा है और पुलिस के निर्देश के बाद भी कोई प्रभावी रोक नहीं लगाई गई है। पीड़ित पक्ष के अनुसार, जब राजस्व न्यायालय ने सीमांकन की कार्रवाई पूरी होने और प्रतिवेदन आने तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है, तो मौके पर निर्माण जारी रहने से आदेश के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका दावा है कि संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार विभागों तक मामला पहुंचाने के बावजूद उन्हें अब तक राहत नहीं मिली है।

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि जब एसडीएम (राजस्व) सिहावल ने विवादित भूमि पर निर्माण कार्य के संबंध में स्थगन आदेश जारी किया है, तो मौके पर उसकी वास्तविक स्थिति क्या है और आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए संबंधित अधिकारियों ने अब तक क्या कार्रवाई की है। पुलिस द्वारा दिनांक 16 अक्टूबर 2026 को मौके पर निरीक्षण और निर्माण रोकने के निर्देश की पुष्टि हो चुकी है; संबंधित उत्तरवादी पक्ष का जवाब अभी उपलब्ध नहीं है। यदि पुलिस के निर्देश और एसडीएम के स्थगन आदेश के बावजूद निर्माण कार्य जारी है, तो मौके का पुनः निरीक्षण कर न्यायालय के आदेश के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई किया जाना महत्वपूर्ण होगा।

संतोष कुमार पटेल ने मामले में प्रशासन से हस्तक्षेप कर विवादित भूमि पर जारी निर्माण कार्य की जांच कराने, स्थगन आदेश का पालन सुनिश्चित कराने और सीमांकन की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से पूरी कराने की मांग की है। अब देखना यह है कि राजस्व विभाग, स्थानीय पुलिस और संबंधित पटवारी स्तर पर इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं और अगली पेशी से पहले न्यायालय के आदेश के पालन को लेकर स्थिति स्पष्ट हो पाती है या नहीं।