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ईरान को बर्बाद करने की तैयारी कर रहे ट्रंप? अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में किया गया बड़ा दावा

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के 7 दिन के सीजफायर प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और नवंबर के अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर फिर हमले की संभावना जताई है।
ट्रंप ने ईरान का 7 दिन का सीजफायर प्रस्ताव ठुकरा दिया, तनाव बढ़ने के संकेत।
ईरान ने होर्मुज खोलने और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत का 7 दिन का प्रस्ताव दिया था।
ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने जून समझौता टूटने के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया।
वॉशिंगटन डीसी: पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के 7 दिन के सीजफायर प्रस्ताव को कथित तौर पर ठुकरा दिया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर फिर से बमबारी शुरू कर सकते हैं। अगर यह रिपोर्ट सही साबित होती है, तो इससे पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव और बढ़ सकता है। यह घटनाक्रम ट्रंप के उस बयान के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने इसी हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया था।
ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में क्या कहा था?
22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण के दौरान ट्रंप ने ईरान को लेकर अपने सामने मौजूद 2 विकल्पों का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें एक बड़ा फैसला लेना है। ट्रंप ने कहा था,

‘मुझे एक बड़ा फैसला लेना है। क्या ईरान के साथ ऐसा समझौता होगा, जिससे वहां पुनर्निर्माण हो सके और वह पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर देश बन सके? शायद मध्य पूर्व या दुनिया के सबसे महान देशों में से एक। या फिर मैं इस्लामिक रिपब्लिक को खत्म कर दूं और वह भी तेजी से, ताकि उसे दोबारा लोगों को मारने और मुल्कों को तबाह करने का मौका न मिले? लेकिन मेरा मानना है कि चुनाव के ठीक बाद हमारे बीच समझौता हो जाएगा, क्योंकि ऐसा नहीं करने का उनके पास कोई कारण नहीं है।’

ईरान ने क्या प्रस्ताव दिया था?
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में बताया था कि ईरान ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए 7 दिन का प्लान अमेरिका के सामने रखा है। इस प्रस्ताव के तहत कुछ शर्तें पूरी होने पर सातवें दिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक बातचीत शुरू करने की बात कही गई थी। अरागची ने संयुक्त राष्ट्र में पत्रकारों से कहा कि यह प्रस्ताव इसी साल जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के एक MoU जैसा है। उन्होंने कहा था,

‘हमने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के सामने एक योजना रखी है। अगर कुछ शर्तें पूरी होती हैं, तो सातवें दिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोल दिया जाएगा और बातचीत फिर से शुरू होगी। यह बेहतर होगा कि अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले ही कोई समझौता हो जाए।’

ईरान ने बातचीत के लिए रखीं ‘उचित शर्तें’
जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल के साथ मुलाकात में अरागची ने कहा कि ईरान ने अमेरिका को कूटनीति आगे बढ़ाने के लिए अपनी उचित शर्तों और जरूरतों की जानकारी दे दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्र में सुरक्षा बहाल करने के लिए ईरान के खिलाफ अमेरिका की दखलंदाजी और आक्रामक कार्रवाई को खत्म करना जरूरी है। ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि ईरान अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीति के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके मुताबिक, बातचीत में ईरान की अच्छी नीयत को कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता।

ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका पर लगाया समझौता तोड़ने का आरोप
अराघची ने बातचीत के दौरान अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बातचीत के बीच हुई इन कार्रवाइयों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने इस बात को भी खारिज किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में असुरक्षा के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया जाए। इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में जून में हुए समझौते के लागू न होने के लिए ट्रंप और अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। पेजेश्कियन ने कहा,

‘हमने आपके राष्ट्रपति के साथ एक समझौता किया था। उस समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे और उसी के आधार पर हम आगे बढ़ने के लिए तैयार थे और अब भी तैयार हैं। इसका ढांचा भी तय हो चुका था। हमने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद नहीं किया था, वह खुला हुआ था और उसे बंद करने का कोई कानूनी आधार या ढांचा नहीं था। उन्होंने हम पर हमला किया। उन्होंने हमारे सम्मानित सर्वोच्च नेता की हत्या कर दी। समस्या यह है कि अमेरिका बातचीत करने के बजाय बमबारी करके मैदान में उतर आया और हर रास्ता बंद कर दिया।’

जून के समझौते के बाद क्या हुआ?
ईरान और अमेरिका के बीच इसी साल जून में एक समझौते को लेकर बातचीत हुई थी। ईरान का कहना है कि वह उस समझौते के तहत आगे बढ़ने को तैयार था, लेकिन उसके मुताबिक अमेरिकी कार्रवाई के कारण यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। ईरान अब भी अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत की बात कर रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने को भी अपने 7 दिन के प्रस्ताव का हिस्सा बनाया है। यह जलमार्ग वैश्विक एनर्जी सप्लाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।