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ईशान किशन ने खत्म किया 13 साल का सूखा, साउथ जोन का पटककर ईस्ट जोन बनी दलीप ट्रॉफी की चैंपियन

दलीप ट्रॉफी 2026 पर ईस्ट जोन ने कब्जा कर लिया है। साउथ जोन के खिलाफ फाइनल मैच ड्रॉ रहा, लेकिन पहली पारी के आधार पर ईशान किशन की कप्तानी वाली ईस्ट जोन को विजेता घोषित कर दिया गया।
ईशान किशन ने आखिर वो काम कर दिखाया, जिसका इंतजार करीब 13 साल से किया जा रहा था। दलीप ट्रॉफी के फाइनल में साउथ जोन को हराकर ईस्ट जोन की टीम ने खिताब पर कब्जा कर लिया। हालांकि फाइनल मुकाबला ड्रॉ रहा, लेकिन पहली पारी के आधार पर ईस्ट जोन को विजेता घोषित कर दिया गया। इस फाइनल की जीत में कप्तान ईशान किशन का सबसे बड़ा योगदान रहा। ना केवल बल्ले से उन्होंने जबरदस्त पारियां खेली, बल्कि कप्तानी में भी अहम मौकों पर सही फैसले लिए, जिसका नतीजा जीत के रूप में सामने आया है।
झारखंड को अपनी कप्तानी में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जिता चुके हैं ईशान किशन
ईस्ट जोन ने साउथ जोन को हराकर दलीप ट्रॉफी को अपने नाम करने में कामयाबी हासिल की है। इससे पहले ईशान ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी भी साल 2025 में जीती थी। तब वे झारखंड के कप्तान थे और झारखंड ने पहली बार इस खिताब को अपने नाम किया था। ईस्ट जोन की टीम पिछले 13 साल से दलीप ट्रॉफी का इंतजार कर रही थी, जो अब जाकर खत्म हुआ है। ईशान को सैयद मुश्ताक अली के फाइनल में भी प्लेयर ऑफ द मैच का अवार्ड मिला था, इस बार भी उन्होंने ये पुरस्कार जीता है, जब​कि ये दोनों टूर्नामेंट अलग अलग फॉर्मेट पर खेले जाते हैं।

प्रथम श्रेणी मैचों में ईशान किशन एक भी मैच नहीं हारे हैं
सबसे अहम और खास बात ये है कि ईशान किशन ने अब तक 16 प्रथम श्रेणी मैचों में टीम की कप्तानी की है और उसमें से आठ में वे जीते हैं और आठ मैच ड्रॉ रहे हैं। यानी एक भी मैच उनकी कप्तानी में टीम हारी नहीं है। ये आपने आप में गजब कारनामा है। इस बीच साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा रहे, उन्होंने फाइनल में 99 रन की पारी जरूर खेली, लेकिन वो इस मुकाबले के लिए नाकाफी रही और टीम हार गई।

ईस्ट जोन के सामने कहीं नहीं टिक साउथ जोन की टीम
फाइनल में पहले बैटिंग करने उतरी ईस्ट जोन की टीम ने पहली पारी में 708 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा कर दिया था। इसमें कप्तान ईशान किशन के 270 रन भी शामिल रहे। इसके बाद जब साउथ जोन की टीम बैटिंग के लिए आई तो 336 रन पर ही पूरी टीम पवेलियन लौट गई। ईशान चाहते तो साउथ जोन को फॉलोआन दे सकते थे और साउथ जोन का फिर से ​बैटिंग के लिए आना पड़ता, लेकिन उन्होंने खुद बैटिंग का फैसला किया। ईस्ट जोन ने अपनी दूसरी पारी में सात विकेट पर 388 रन बना लिए थे, तभी मैच ड्रॉ घोषित किया गया और पहली पारी की बढ़त के आधार पर ईस्ट जोन की टीम चैंपियन बन गई।