Become a member

Get the best offers and updates relating to Liberty Case News.

― Advertisement ―

spot_img
HomeNewsबारिश ने बढ़ाई कच्चे मकानों में रहने वालों की चिंता, 8 से...

बारिश ने बढ़ाई कच्चे मकानों में रहने वालों की चिंता, 8 से 10 घर गिरने की कगार पर

आर्थिक तंगी के बीच परिवारों पर मंडरा रहा बेघर होने का खतरा, सुशीला देवी ने प्रशासन से पक्के मकान की सुविधा देने की लगाई गुहार

नागपुर। हिंगना रोड स्थित बुद्ध विहार, भीम नगर इलाके में बारिश ने कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार बारिश के चलते यहां करीब 8 से 10 कच्चे मकानों के गिरने का खतरा बना हुआ है। कई मकानों की हालत ऐसी हो गई है कि परिवारों को हर समय हादसे की आशंका सताती रहती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने अब बारिश से बचने के साथ रहने की सुरक्षित जगह का संकट भी खड़ा हो गया है।

इसी इलाके में रहने वाली सुशीला बैजनाथ तिवारी ने बताया कि उनका परिवार कई वर्षों से यहां रह रहा है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वे अपने मकान को पक्का कराने में सक्षम नहीं हैं। बारिश के मौसम में कच्चे मकानों की हालत लगातार खराब होती जा रही है। दीवारों में नमी आने और मिट्टी कमजोर होने से मकानों के गिरने का खतरा बढ़ गया है।

सुशीला देवी का कहना है कि उनके आसपास भी कई परिवार इसी तरह के कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं। बारिश के दौरान घरों में पानी आने और मकानों के कमजोर होने से परिवारों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

स्थानीय लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि आर्थिक तंगी के कारण वे अपने स्तर पर मकानों की मरम्मत या उन्हें पक्का कराने में असमर्थ हैं। बारिश के दौरान यदि कोई मकान अचानक गिर जाता है तो परिवार का सामान मलबे में दबने के साथ जानमाल का नुकसान भी हो सकता है।

प्रशासन से मदद की उम्मीद

सुशीला देवी और प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित आवास की सुविधा उपलब्ध कराई जाए या सरकारी योजना के तहत उनके कच्चे मकानों को पक्का कराने में सहायता दी जाए।

पीड़ित परिवारों की मांग है कि बारिश के मौसम को देखते हुए प्रशासन तत्काल सर्वे कराकर जर्जर और कच्चे मकानों की स्थिति का जायजा ले। यदि समय रहते मदद नहीं मिली तो लगातार बारिश के बीच किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

अब देखना यह है कि प्रशासन इन आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और उन्हें सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाता है।