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चार महीने से सिक्योरिटी गार्ड को नहीं मिली सैलरी, 15 हजार रुपये मासिक वेतन के लिए भटक रहा कर्मचारी; मालिक पर टालमटोल का आरोप

मुंबई। गोरेगांव में एक प्लास्टिक कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम कर रहे बदायूं निवासी रामेंद्र ने चार महीने से वेतन नहीं मिलने का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि वह लगातार मेहनत कर ड्यूटी कर रहा है, लेकिन उसकी करीब 15 हजार रुपये मासिक सैलरी का भुगतान नहीं किया जा रहा है। वेतन नहीं मिलने से उसके सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी हो गई हैं।

रामेंद्र के मुताबिक वह गोरेगांव में राम मंदिर स्टेशन के पास स्थित एक प्लास्टिक कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड का काम करते हैं। उनका कहना है कि कंपनी के मालिक प्रभु मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और वर्तमान में कांगो बाली क्षेत्र में फ्लैट लेकर रह रहे हैं।

पीड़ित का दावा है कि वह पिछले करीब चार महीने से कंपनी में काम कर रहा है। वेतन लेने के लिए वह लगातार करीब डेढ़ महीने से मालिक से संपर्क कर रहा है, लेकिन अभी तक उसे मेहनत की कमाई नहीं मिली है। रामेंद्र का आरोप है कि जब भी वह अपने वेतन की मांग करता है तो कभी फोन बंद कर दिया जाता है और कभी आज-कल में भुगतान करने की बात कहकर उसे टाल दिया जाता है।

बार-बार आश्वासन के बाद भी नहीं मिला भुगतान

रामेंद्र का कहना है कि कई बार वेतन मिलने की उम्मीद में वह इंतजार करता रहा, लेकिन लगातार तारीख आगे बढ़ती गई। उसका आरोप है कि मालिक की ओर से कभी आज पैसे देने तो कभी अगले दिन भुगतान करने की बात कही जाती है, लेकिन वास्तविक भुगतान अब तक नहीं हुआ।

चार महीने की मेहनत की रकम अटकी होने से परेशानी

पीड़ित के अनुसार करीब 15 हजार रुपये मासिक वेतन के हिसाब से कई महीनों की रकम बकाया है। लगातार वेतन नहीं मिलने के कारण रोजमर्रा के खर्च चलाना भी मुश्किल हो रहा है। रामेंद्र का कहना है कि उसने कंपनी में पूरी ईमानदारी से काम किया है और अब वह केवल अपनी मेहनत की कमाई चाहता है।

पीड़ित की मांग है कि कंपनी प्रबंधन उसके बकाया वेतन का भुगतान जल्द करे। उसका कहना है कि मजदूर और कर्मचारी अपनी मेहनत के बदले वेतन की उम्मीद में काम करते हैं, ऐसे में लंबे समय तक भुगतान रोकना उसके लिए गंभीर आर्थिक संकट पैदा कर रहा है।

रामेंद्र ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अपनी बकाया सैलरी दिलाने की मांग की है। हालांकि, वेतन रोकने के कारणों और कंपनी प्रबंधन का पक्ष इस मामले में सामने नहीं आया है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी अभी नहीं हो सकी है।