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बारिश की कमी से जूझ रहा तेलंगाना, भगवान वरुण को प्रसन्न करने के लिए ‘महा वरुण यज्ञ’ कर रही कांग्रेस सरकार

महा वरुण यज्ञ में 108 पुजारी और वैदिक विद्वान भाग ले रहे हैं। अनुष्ठान विजय विहार टूरिज्म गेस्ट हाउस के परिसर में किया जा रहा है। सीएम रेवंत रेड्डी दोपहर तीन बजे पूर्णाहुति समारोह में शामिल होंगे।
बारिश की कमी से जूझ रहे तेलंगाना में कांग्रेस सरकार भगवान वरुण को प्रसन्न करने के लिए ‘महा वरुण यज्ञ’ कर रही है। सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी और उनकी पत्नी ने नागार्जुन सागर में कृष्णा नदी के किनारे इस वरुण यज्ञ (बारिश के लिए अनुष्ठान) की औपचारिक शुरुआत की। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी दोपहर में पूर्णाहुति कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस वरुण यज्ञ में 108 पुजारी और वैदिक विद्वान भाग ले रहे हैं।
अल नीनो के कारण बचे हुए मॉनसून पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं और ऊपरी इलाकों के जलाशय अभी तक भरे नहीं हैं। इसे देखते हुए, राज्य सरकार सोमवार को नागार्जुन सागर जलाशय पर ‘महा वरुण यज्ञ’ कर रही है, ताकि अच्छी बारिश हो, जलाशय पूरी तरह भरें और कृष्णा व गोदावरी नदियों में पानी का बहाव अच्छा बना रहे। यह अनुष्ठान विजय विहार टूरिज्म गेस्ट हाउस के परिसर में किया जा रहा है।
शाम 4 बजे हैदराबाद जाएंगे सीएम रेड्डी
सीएम ए. रेवंत रेड्डी दोपहर 3 बजे ‘पूर्णाहुति’ समारोह में शामिल होंगे। कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री दोपहर 2:00 बजे हेलीकॉप्टर से हैदराबाद से रवाना होंगे। मुख्यमंत्री दोपहर 2:45 बजे नागार्जुन सागर हिल कॉलोनी स्थित बीसी रेजिडेंशियल स्कूल पहुंचेंगे और वहां से विजय विहार टूरिज्म गेस्ट हाउस में अनुष्ठान स्थल के लिए जाएंगे। अनुष्ठान पूरा होने के बाद, मुख्यमंत्री शाम 4 बजे हैदराबाद के लिए रवाना होंगे।
यज्ञ के लिए 11 होम कुंड बनाए
कुल 108 ऋत्विक (पुजारी) वरुण यज्ञ संपन्न कराएंगे। यज्ञ के लिए 11 होम कुंड बनाए गए हैं। यह अनुष्ठान यदागिरिगुट्टा श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर के पुजारियों और वैदिक विद्वानों द्वारा किया जा रहा है। सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा कि मुख्यमंत्री 10 अगस्त को दिन में 3 बजकर 24 मिनट पर यज्ञ की पूर्णाहुति में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि यदाद्रिगुट्टा मंदिर की देखरेख में बड़ी संख्या में पंडितों की भागीदारी के साथ यज्ञ का वृहद स्तर पर आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा मानसून के दौरान ‘अल नीनो’ प्रभाव के कारण बारिश में कमी को देखते हुए पर्याप्त वर्षा की कामना के लिए यह अनुष्ठान किया जा रहा है।