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5 कुत्ते, 12 गाय और 2 बैल, ऐसा था नाना पाटेकर का 27 एकड़ का फार्महाउस, गांव में जीते थे सादगी भरी जिंदगी

नाना पाटेकर सादगी पसंद अभिनेता थे, जो मुंबई की चकाचौंध से दूर गांव की जिंदगी पसंद करते थे। खडकवासला स्थित 27 एकड़ फार्महाउस में खेती, पशुपालन और प्रकृति के बीच समय बिताते थे।
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। दशकों तक सिल्वर स्क्रीन पर अपनी दमदार अदाकारी से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले नाना पाटेकर पर्दे के बाहर बेहद सादगी भरी जिंदगी जीने के लिए भी जाने जाते थे। जहां फिल्मी दुनिया में बड़े सितारों के आलीशान घर और लग्जरी लाइफस्टाइल अक्सर चर्चा में रहती है, वहीं नाना को शोर-शराबे और दिखावे से हमेशा दूरी पसंद थी। मुंबई में रहने के बावजूद उनका मन शहर की भागदौड़ में कम और गांव की शांत जिंदगी में ज्यादा लगता था। पुणे के पास खडकवासला में उनका करीब 27 एकड़ में फैला फार्महाउस था, जहां वह खेती करते और प्रकृति के बीच समय बिताते थे।
मुंबई में साधारण घर, गांव में सुकून
नाना पाटेकर का जीवन उनकी फिल्मों की तरह ही अलग अंदाज वाला रहा। इतने बड़े अभिनेता होने के बावजूद उन्होंने मुंबई में भी बेहद साधारण तरीके से रहना पसंद किया। वह अंधेरी के लोखंडवाला इलाके में समर्थ नगर में स्थित एक साधारण वन बीएचके फ्लैट में रहते थे। उनकी जीवनशैली में दिखावे की जगह जरूरतों को प्राथमिकता मिलती थी। इसके अलावा पुणे के पास खडकवासला में उनका फार्महाउस था। महाराष्ट्र के रत्नागिरी में उनका पुश्तैनी गांव भी था, जबकि गोवा के डोना पाउला में भी उनका एक घर था। हालांकि इन तमाम जगहों के बीच अगर किसी जगह से उनका सबसे गहरा जुड़ाव था तो वह गांव और खेती थी। फार्महाउस पर वह सिर्फ छुट्टियां बिताने नहीं जाते थे, बल्कि खेती को अपनी जिंदगी का हिस्सा मानते थे।
27 एकड़ के फार्महाउस में करते थे खेती
खडकवासला के पास स्थित नाना पाटेकर का फार्महाउस करीब 27 एकड़ में फैला हुआ बताया जाता है। यहां की खूबसूरती और सादगी उनके व्यक्तित्व से मेल खाती थी। फार्महाउस में लकड़ी का फर्नीचर, मिट्टी से जुड़ी टेराकोटा फ्लोरिंग और लकड़ी की बीम वाली छत जैसे तत्व देखने को मिलते थे। चारों तरफ हरियाली और प्राकृतिक माहौल इस जगह को मुंबई की चकाचौंध से बिल्कुल अलग बनाता था। नाना का खेती से लगाव केवल शौक तक सीमित नहीं था। वह अपने खेतों में चावल, गेहूं, बाजरा, प्याज और लहसुन जैसी फसलें उगाते थे। उनके लिए मिट्टी से जुड़ना किसी स्टारडम से कम नहीं था। खेती उन्हें एक ऐसा जीवन देती थी, जहां वह कैमरों और फिल्मी दुनिया की व्यस्तता से दूर खुद के साथ वक्त बिता सकते थे।
लॉकडाउन में फार्महाउस बना ठिकाना
कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में भी नाना पाटेकर ने अपने फार्महाउस पर काफी समय बिताया था। एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उस दौरान उनके आसपास कई जानवर भी थे। उनके फार्महाउस में पांच कुत्ते, 12 गाय और दो बैल थे। जानवरों और खेती के बीच बिताया गया यह समय उनके लिए किसी छुट्टी से ज्यादा अपनी पसंद की जिंदगी जीने जैसा था। उनके फार्महाउस में सात कमरे और एक बड़ा हॉल भी था। लेकिन इन सुविधाओं के बावजूद यह जगह किसी आलीशान सेलिब्रिटी बंगले जैसी नहीं थी। यहां की खासियत इसकी सादगी, हरियाली और गांव जैसा माहौल था।
मैं फिल्म इंडस्ट्री से नहीं हूं…’
नाना पाटेकर ने एक टीवी शो में अपने गांव से लगाव और मुंबई से दूरी को लेकर खुलकर बात की थी। उन्होंने बताया था कि वह खुद को फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा नहीं मानते। उनके लिए फिल्में काम थीं और काम खत्म होने के बाद वह अपनी दुनिया में लौट जाना पसंद करते थे। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने कभी पार्टियों और फिल्मी मेल-जोल को अपनी जिंदगी का जरूरी हिस्सा नहीं बनाया। उनका मन गांव में लगता था और उन्हें वहां का शांत जीवन पसंद था। उनके मुताबिक जरूरतों को सीमित रखना मुश्किल नहीं है और जब इंसान अपनी जरूरतें कम कर लेता है तो जिंदगी अपने आप आसान हो जाती है।
पहाड़ों के बीच था उनका सुकून
नाना पाटेकर ने अपने घर और आसपास के माहौल का जिक्र करते हुए कहा था कि उन्हें एयर कंडीशनर की जरूरत महसूस नहीं होती। उनका मानना था कि शहर में जहां घर चार दीवारों से घिरा होता है, वहीं उनका घर पहाड़ों से घिरा है। यही प्राकृतिक माहौल उनके लिए सबसे बड़ा सुकून था। एक ऐसे अभिनेता के लिए जिसने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा कैमरों और फिल्मी चकाचौंध के बीच बिताया, गांव, खेत, पशु और प्रकृति शायद असली आजादी का दूसरा नाम थे। नाना पाटेकर का यह पहलू बताता है कि पर्दे पर बेहद प्रभावशाली दिखने वाला यह सितारा निजी जिंदगी में कितना जमीन से जुड़ा हुआ इंसान था।