Become a member

Get the best offers and updates relating to Liberty Case News.

― Advertisement ―

spot_img
HomeNews15 वर्षीय किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म के आरोप, तीन नामजद आरोपियों की...

15 वर्षीय किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म के आरोप, तीन नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने का दावा; पूर्व विधायक ने DGP से की कठोर कार्रवाई की मांग

गया। मगध विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र में 15 वर्षीय किशोरी के कथित अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि 16 जुलाई 2026 को किशोरी का अपहरण किया गया और उसे करीब दो दिनों तक बंधक बनाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। मामले में तीन युवकों को नामजद आरोपी बनाया गया है। परिवार का दावा है कि मुकदमा दर्ज होने के बावजूद अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

इस मामले को लेकर गया निवासी एवं मगध विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय एवं एशियाई अध्ययन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष तथा पूर्व विधायक डॉ. विनोद कुमार यादवेन्दु ने बिहार के मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक और मगध प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक को लिखित शिकायत भेजकर तत्काल कठोर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने अपने आवेदन में मामले की जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी में कथित लापरवाही का आरोप लगाते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।

पीड़िता की मां रजन्ती देवी की ओर से दिए गए आवेदन के अनुसार, 16 जुलाई की रात उनकी 15 वर्षीय बेटी का कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया था। आरोप है कि उसे दादपुर गांव में भूसा रखने की जगह पर करीब दो दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया और इस दौरान उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। बाद में पुलिस ने किशोरी को बरामद किया।

परिवार की ओर से मामले में अनुपम कुमार, पिता यदुनंदन यादव, रवि यादव, पिता स्वर्गीय मोहन यादव और संतोष साव, पिता राजेंद्र साव को नामजद आरोपी बताया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और आरोपियों का पक्ष सामने नहीं आया है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि किशोरी का न्यायालय में बयान दर्ज कराया गया है। परिवार का दावा है कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान किशोरी ने आरोपियों के नाम बताए। इसके बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से परिवार में नाराजगी और भय का माहौल है।

पूर्व विधायक ने अपने आवेदन में जांच की निगरानी कर रहे सहायक दारोगा पप्पू कुमार चौधरी की भूमिका पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि पीड़ित परिवार से कथित तौर पर 5 हजार रुपये की मांग की गई और पैसे नहीं देने पर जांच प्रभावित करने की बात कही गई। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष इस संबंध में सामने आना बाकी है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपियों के परिजनों और संबंधित पुलिसकर्मी के बीच संपर्क होने के कारण जांच प्रभावित हो रही है। आवेदन में यह भी दावा किया गया है कि नामजद आरोपी आसपास के गांवों में मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी गिरफ्तारी के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही।

पूर्व विधायक ने मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में जांच कराने, नामजद आरोपियों के खिलाफ कानून के तहत तत्काल कार्रवाई करने तथा पीड़ित परिवार को सुरक्षा और न्याय दिलाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच कर दोष सिद्ध होने पर विभागीय कार्रवाई की मांग भी उठाई है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि उसने मामले को लेकर कई स्तरों पर आवेदन दिए हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से परिवार परेशान है। परिवार की मांग है कि नाबालिग पीड़िता के मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ POCSO Act समेत लागू कानूनों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए।

मामला नाबालिग से जुड़ा होने के कारण इसकी जांच और न्यायिक प्रक्रिया में पीड़िता की पहचान की गोपनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है। पुलिस की जांच और न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही आरोपों की अंतिम पुष्टि हो सकेगी।